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पहली बार ‘इच्छामृत्यु’ की मिली मंजूरी, हरीश राणा केस में फैसला सुनाते भावुक हो गए SC के जज पारदीवाला

पहली बार ‘इच्छामृत्यु’ की मिली मंजूरी, हरीश राणा केस में फैसला सुनाते भावुक हो गए SC के जज पारदीवाला

Harish Rana SC Verdict Live Updates: सुप्रीम कोर्ट ने इच्छा मृत्यु (Euthanasia) से जुड़े एक ऐतिहासिक मामले में बुधवार को अपना महत्वपूर्ण फैसला सुना दिया है। जस्टिस पारदीवाला की बेंच ने गरिमापूर्ण मृत्यु के अधिकार और लाइफ सपोर्ट हटाने की अनुमति दी। यह भारत में पैसिव यूथेनेशिया का पहला ऐसा केस है जहां अदालत ने सीधे मंजूरी दी है। फैसला सुनाते हुए जस्टिस पारदीवाला भावुक हो गए और कहा, “यह फैसला कानून से ज्यादा मानवीय पीड़ा पर आधारित है।”

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आज (11 मार्च 2026) हरीश राणा मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसमें एक असाध्य बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति को इच्छा मृत्यु की अनुमति दी गई। 45 वर्षीय हरीश राणा, जो पिछले 8 साल से कोमा में हैं और लाइफ सपोर्ट पर हैं, की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि “जीवन का अधिकार मृत्यु से बेहतर नहीं है जब जीवन सिर्फ यंत्रों पर निर्भर हो।” यह फैसला 2018 के अरुणा शानबाग मामले के बाद यूथेनेशिया पर नई दिशा देता है।

फैसले की मुख्य बातें:

पैसिव यूथेनेशिया की मंजूरी: अदालत ने डॉक्टरों को हरीश राणा का लाइफ सपोर्ट हटाने की अनुमति दी, लेकिन एक्टिव यूथेनेशिया (जहर देकर मारना) पर रोक बरकरार रखी।

शर्तें: फैसले से पहले मेडिकल बोर्ड की जांच अनिवार्य होगी, परिवार की सहमति जरूरी, और अदालत की निगरानी में प्रक्रिया होगी।

जज की भावुक अपील: जस्टिस पारदीवाला ने फैसला पढ़ते हुए आंसू रोकते हुए कहा, “मैंने राणा परिवार की पीड़ा देखी है। यह फैसला उनके लिए राहत है, लेकिन समाज के लिए एक सवाल छोड़ता है – क्या हम गरिमापूर्ण मौत का हक दे सकते हैं?” बेंच में जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस एमएम सुंदरेश भी शामिल थे।

कानूनी आधार: अदालत ने अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का हवाला दिया और कहा कि “असहनीय पीड़ा में जीना जीवन नहीं है।”

लाइव अपडेट्स (समयानुसार):

11:30 AM: सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाना शुरू किया। जस्टिस पारदीवाला ने मामले की संवेदनशीलता पर जोर दिया।

11:45 AM: फैसले में यूथेनेशिया गाइडलाइंस जारी की गईं – मरीज की इच्छा, परिवार की राय, और विशेषज्ञों की रिपोर्ट जरूरी।

12:00 PM: हरीश राणा के परिवार ने कोर्ट के बाहर मीडिया से कहा, “यह हमारे लिए न्याय है। हरीश को अब मुक्ति मिलेगी।” वकील प्रशांत भूषण ने इसे “मानवीय फैसला” बताया।

12:15 PM: स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि सरकार नए कानून पर विचार करेगी। विपक्ष ने इसे “दया मृत्यु” का सकारात्मक कदम माना।

12:30 PM: मानवाधिकार संगठनों ने फैसले का स्वागत किया, लेकिन दुरुपयोग की आशंका जताई।

यह फैसला भारत में यूथेनेशिया पर बहस को नई दिशा देगा। कई पुराने केस अब फिर से खुल सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 6 महीने में यूथेनेशिया पर व्यापक कानून बनाने को कहा है। स्थिति पर नजर बनी हुई है।

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