Explainer: ईरान-चीन ‘ऑयल डील’: कैसे प्रतिबंधों को मात देकर चीन ने बनाया अपना सुरक्षा कवच
Explainer: ईरान-चीन ‘ऑयल डील’: कैसे प्रतिबंधों को मात देकर चीन ने बनाया अपना सुरक्षा कवच
ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर गहरा संकट मंडरा रहा है। ईरान अपने कुल कच्चे तेल निर्यात का 80-90% चीन को भेजता है, जो दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। 2025 में ईरान से चीन ने औसतन 1.3-1.6 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) तेल खरीदा, जो चीन के कुल तेल आयात का 13-19% था। लेकिन इस संकट में चीन ज्यादा परेशान नहीं दिख रहा। वजह? चीन ने सालों से ऊर्जा सुरक्षा की मजबूत तैयारी की है। आइए समझते हैं कैसे।
ईरान से चीन का तेल आयात कितना महत्वपूर्ण?
ईरान के कुल निर्यात का 80-90% चीन जाता है (Kpler और अन्य एनालिटिक्स फर्म्स के अनुसार)।
2025 में ईरान से चीन ने लगभग 1.38 मिलियन bpd तेल लिया, जो चीन के कुल आयात (11-11.6 मिलियन bpd) का 12-15% था।
यह तेल सस्ता (डिस्काउंटेड) होता है, क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण “शैडो फ्लीट” (अनरजिस्टर्ड जहाजों) से आता है।
चीन क्यों नहीं घबराया? मुख्य वजहें
भारी स्टॉकपाइलिंग (Strategic Reserves)
चीन ने 2025 में रिकॉर्ड स्तर पर तेल जमा किया। कम कीमतों ($60 के आसपास) और रूसी, ईरानी, वेनेजुएला के सस्ते तेल का फायदा उठाकर 900,000 से 1 मिलियन bpd स्टोरेज में डाला।
कुल क्रूड स्टॉक (स्ट्रैटेजिक + कमर्शियल): 1.2 बिलियन बैरल से ज्यादा (कुछ अनुमान 1.47 बिलियन तक)।
यह 90-130 दिनों के आयात के बराबर है (IEA की 90 दिनों की सिफारिश से ज्यादा)।
2025-2026 में 11 साइट्स पर 169 मिलियन बैरल अतिरिक्त स्टोरेज क्षमता जोड़ी जा रही है, जिसमें अंडरग्राउंड बेस शामिल हैं।
इससे ईरान या होर्मुज से 2-3 महीने तक डिसरप्शन होने पर भी चीन आसानी से चल सकता है।
आपूर्ति स्रोतों में विविधता (Diversification)
चीन ने रूस, सऊदी अरब, इराक, ओमान आदि से आयात बढ़ाया।
रूस: 2025-2026 में प्रमुख सप्लायर (18% तक), पाइपलाइन से सीधा आता है (होर्मुज पर निर्भर नहीं)।
सऊदी अरब: 14%।
ईरान से पहले ही 2026 में आयात कम किया और रूसी तेल बढ़ाया।
कुल मिलाकर, होर्मुज से आने वाला तेल चीन के कुल ऊर्जा खपत का सिर्फ 6-15% प्रभावित करता है।
ऊर्जा मिक्स में बदलाव
घरेलू उत्पादन बढ़ाया (4 मिलियन bpd लक्ष्य)।
इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) और रिन्यूएबल एनर्जी पर तेजी से फोकस: गैसोलीन डिमांड पीक पर पहुंच चुकी है।
कोयला, पाइपलाइन गैस (रूस, म्यांमार, सेंट्रल एशिया से) और LNG का बैकअप।
होर्मुज से LNG भी प्रभावित होता है, लेकिन चीन का कुल एनर्जी मिक्स में तेल का हिस्सा कम हो रहा है।
संभावित चुनौतियां
लंबे समय (2-3 महीने से ज्यादा) तक संकट रहने पर कीमतें बढ़ेंगी, जो चीन की अर्थव्यवस्था (एक्सपोर्ट, फैक्टरियां) पर असर डाल सकती हैं।
लेकिन चीन ने 2010 से ही ऐसे “गेopolitical shocks” के लिए तैयारी की है, इसलिए यह “मल्टी-मंथ डिसरप्शन” झेल सकता है।
निष्कर्ष: चीन ईरान का सबसे बड़ा खरीदार है, लेकिन उसकी स्ट्रैटेजिक रिजर्व, विविध सप्लायर्स, घरेलू उत्पादन और एनर्जी ट्रांजिशन की वजह से होर्मुज संकट से तुरंत बड़ा नुकसान नहीं होगा। यह युद्ध चीन की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति को और मजबूत करने का सबूत बन रहा है। वैश्विक तेल कीमतें भले बढ़ें, लेकिन बीजिंग ने खुद को काफी हद तक सुरक्षित कर लिया है।
