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ईरान-इजरायल युद्ध से LPG सप्लाई पर खतरा: मोदी सरकार एक्शन मोड में, घरेलू गैस की किल्लत रोकने के लिए लिए बड़े फैसले

नई दिल्ली, 10 मार्च 2026: अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जारी तीव्र युद्ध अब भारत की रसोई तक पहुंच गया है। पश्चिम एशिया में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और खाड़ी क्षेत्र की आपूर्ति बाधित होने से एलपीजी (Liquefied Petroleum Gas) की आयात पर भारी असर पड़ा है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक है, जहां 85-90% जरूरत गल्फ देशों से पूरी होती है। युद्ध के कारण आयात में रुकावट से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर (19 किलो वाले, होटल-रेस्टोरेंट में इस्तेमाल) की भारी किल्लत हो गई है, जबकि घरेलू सिलेंडर (14.2 किलो) पर भी दबाव बढ़ रहा है।

कुछ शहरों में लंबी कतारें लग रही हैं, होटल-रेस्टोरेंट बंद होने की चेतावनी दे रहे हैं, और कीमतों में उछाल आया है। सरकार ने स्थिति को देखते हुए एक्शन मोड में आकर कई बड़े और तेज फैसले लिए हैं:

सरकार के प्रमुख फैसले और एक्शन

Essential Commodities Act (ESMA) लागू: पूरे देश में ESMA लागू कर दिया गया है ताकि जमाखोरी, ब्लैक मार्केटिंग और कालाबाजारी रोकी जा सके। इससे एलपीजी को आवश्यक वस्तु घोषित कर आपूर्ति पर सख्त नियंत्रण लगाया गया।

रिफाइनरियों को प्रोडक्शन बढ़ाने का आदेश: पेट्रोलियम मंत्रालय ने सभी तेल रिफाइनरियों (सरकारी और प्राइवेट) को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने का निर्देश दिया। प्रोपेन और ब्यूटेन जैसी हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम्स को पेट्रोकेमिकल्स की बजाय एलपीजी पूल में डालने को कहा गया। इससे घरेलू उत्पादन बढ़ाकर आयात निर्भरता कम करने की कोशिश।

घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता: घरेलू (कुकिंग गैस) एलपीजी को सबसे ऊपर रखा गया। कमर्शियल, इंडस्ट्रियल और अन्य यूजर्स से सप्लाई रीडायरेक्ट कर घरों, अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों तक पहुंच सुनिश्चित की जा रही है। तेल कंपनियां (IOCL, BPCL, HPCL) को इसी के अनुसार काम करने का आदेश।

बुकिंग नियम में बदलाव: घरेलू सिलेंडर रिफिल के लिए न्यूनतम 21-25 दिन का इंटर-बुकिंग पीरियड लागू कर दिया गया ताकि लोग जरूरत से ज्यादा सिलेंडर न भरवा सकें और जमाखोरी रुके।

कीमतों में बढ़ोतरी: घरेलू सिलेंडर की कीमत में 7% तक बढ़ोतरी (दिल्ली में 913 रुपये तक पहुंची), जबकि कमर्शियल 19 किलो सिलेंडर अब 1,883 रुपये हो गए। यह ग्लोबल कीमतों में उछाल के कारण हुआ।

पैनल गठन: होटल-रेस्टोरेंट और इंडस्ट्री की मांगों पर विचार के लिए स्पेशल पैनल बनाया गया। वैकल्पिक स्रोत (जैसे यूएस, रूस) से आयात बढ़ाने की कोशिश जारी।

रूसी तेल पर छूट: अमेरिका ने भारत को सीमित समय के लिए रूसी क्रूड ऑयल खरीदने की छूट दी, जिससे अन्य फ्यूल्स पर असर कम करने में मदद मिलेगी।

संकट की गहराई

भारत का 90% से ज्यादा एलपीजी आयात गल्फ से आता है। युद्ध से जहाजों का रूट प्रभावित, फ्रेट और इंश्योरेंस कॉस्ट 40-50% तक बढ़ गई।

स्टॉक सिर्फ 10-30 दिनों का बचा है। कमर्शियल सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित—बेंगलुरु, चेन्नई, मुंबई, पुणे जैसे शहरों में होटल बंद होने की आशंका।

घरेलू यूजर्स (33 करोड़ से ज्यादा) को फिलहाल राहत, लेकिन अगर युद्ध लंबा खिंचा तो राशनिंग या और बढ़ोतरी संभव।

पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि पर्याप्त रिजर्व हैं और स्थिति नियंत्रण में है। हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर होर्मुज स्ट्रेट पर ब्लॉकेज रहा तो संकट गहरा सकता है। सरकार लगातार मॉनिटरिंग कर रही है—क्या जल्द सप्लाई नॉर्मल होगी, या रसोई का चूल्हा प्रभावित होगा? स्थिति पर नजर बनी हुई है।

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