उत्तराखंड

केदारनाथ वन्यजीव अभ्यारण्य के रेल बीट क्षेत्र में भीषण जंगल की आग, वन संपदा जलकर राख, वन्यजीवों पर संकट

रुद्रप्रयाग: केदारनाथ वन्यजीव अभ्यारण्य के रेल बीट क्षेत्र में भीषण जंगल की आग, वन संपदा जलकर राख, वन्यजीवों पर संकट

रुद्रप्रयाग/फाटा: केदारनाथ वन्यजीव अभ्यारण्य के अंतर्गत रेल बीट क्षेत्र के घने जंगलों में 9 मार्च (सोमवार) को लगी भीषण आग ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। आग की लपटें तेजी से फैल रही हैं, जिससे हजारों एकड़ वन संपदा जलकर राख हो रही है। जंगली जानवरों के जीवन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है और आसपास के गांवों में धुआं पहुंचने से स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है।

आग कैसे लगी और कितना नुकसान?

सोमवार दोपहर रेल बीट के जंगलों में अचानक आग भड़क उठी, जो देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर गई। सूखी घास, पत्तियां और पेड़-पौधे तेजी से जलने लगे। आग से उठता काला धुआं फाटा, अगस्त्यमुनि और आसपास के गांवों तक पहुंच गया, जिससे सांस लेने में तकलीफ हो रही है।

वन क्षेत्राधिकारी विमल भट्ट ने बताया कि आग लगने की सूचना मिलते ही 6 सदस्यीय वन कर्मियों की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने तुरंत आग बुझाने का अभियान शुरू किया। उन्होंने कहा, “क्षेत्र का अधिकांश हिस्सा चट्टानी है, जिससे आग बुझाने में भारी दिक्कत हो रही है। फिर भी हम लगातार प्रयास कर रहे हैं। अब तक ज्यादातर हिस्सों में आग पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया गया है। जल्द ही पूरी तरह काबू पा लिया जाएगा।”

अगस्त्यमुनि के बावई क्षेत्र में भीषण नुकसान

विकासखंड अगस्त्यमुनि के बावई के नजदीक जंगलों में भी आग लगने से पूरा इलाका जलकर राख हो गया है। रात में लपटें इतनी ऊंची उठ रही हैं कि दूर से दिखाई दे रही हैं। ग्रामीणों में भय का माहौल है। जंगली जानवर (तेंदुआ, हिरण, लंगूर आदि) अब गांवों के आसपास मंडरा रहे हैं, जिससे लोगों को अपनी जान का डर सता रहा है।

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग के प्रयास नाकाफी हैं और आग पर समय रहते काबू नहीं पाया गया तो यह दूसरी पहाड़ी पर भी फैल सकती है, जिससे लाखों-करोड़ों की वन संपदा नष्ट हो सकती है।

आग लगने के संभावित कारण

सूखी घास और पत्तियों में किसी ने सिगरेट या आग का ठूंठ फेंका हो।

जंगल में घास-फूस काटने या चराई के दौरान लापरवाही।

कुछ स्थानीय लोग मानते हैं कि यह मानवजनित आग है, क्योंकि प्राकृतिक कारणों से इतनी तेजी से नहीं फैलती।

प्रशासन और वन विभाग की कार्रवाई

वन विभाग ने अतिरिक्त टीमों को रवाना किया है।

फायर टेंडर और पानी के टैंकरों की मदद से आग बुझाई जा रही है।

जिला प्रशासन ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे जंगल में आग न लगाएं और सूचना मिलने पर तुरंत सूचित करें।

डीएम रुद्रप्रयाग ने स्थिति की समीक्षा की और आवश्यक निर्देश दिए हैं।

पर्यावरणीय प्रभाव

हजारों पेड़-पौधे जल चुके हैं, जिससे जैव विविधता को गहरा नुकसान।

कार्बन उत्सर्जन बढ़ा, जिससे जलवायु पर असर।

वन्यजीवों के लिए खतरा: कई जानवर आग से भागकर गांवों की ओर आ रहे हैं।

वन विभाग और प्रशासन का प्रयास जारी है। यदि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया गया तो नुकसान और बढ़ सकता है। स्थानीय लोग और पर्यावरण प्रेमी इस घटना को गंभीरता से ले रहे हैं और जंगलों की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

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