राजनीति

‘तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति की मदद लेनी चाहिए’: मिडिल ईस्ट संघर्ष पर विदेश मंत्री एस जयशंकर का बड़ा बयान

मिडिल ईस्ट में तनाव को लेकर राज्यसभा में विदेश मंत्री एस जयशंकर का बयान: मुख्य बातें

नई दिल्ली: आज (9 मार्च 2026) राज्यसभा में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी संघर्ष (ईरान-अमेरिका-इजरायल) पर सुओ मोटू बयान दिया। उन्होंने सदन को संघर्ष की शुरुआत (28 फरवरी 2026 से), भारत की चिंता और प्रतिक्रिया से अवगत कराया। बयान के दौरान विपक्ष के हंगामे के बीच उन्होंने मुख्य रूप से शांति, संयम और भारतीयों की सुरक्षा पर जोर दिया।

जयशंकर ने क्या-क्या कहा? (मुख्य बिंदु)

संवाद और कूटनीति ही समाधान: भारत मानता है कि सभी मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत और डिप्लोमेसी का सहारा लिया जाना चाहिए। सैन्य संघर्ष से कोई स्थायी हल नहीं निकलेगा।

डी-एस्केलेशन और संयम की अपील: सभी पक्षों से तनाव कम करने (de-escalation), संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह।

भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता: क्षेत्र में लाखों भारतीय काम करते हैं। सरकार हर संभव प्रयास कर रही है कि वे सुरक्षित रहें और जरूरत पड़ने पर वापस लाए जाएं। अब तक 67,000 भारतीय वापस लाए जा चुके हैं।

ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई चेन पर नजर: खाड़ी देशों से भारत का सालाना 200 बिलियन डॉलर का व्यापार है। क्रूड ऑयल सप्लाई, शिपिंग रूट्स और ग्लोबल ट्रेड पर असर की बारीकी से निगरानी। भारतीय उपभोक्ता के हित सर्वोपरि हैं।

ईरान लीडरशिप से संपर्क मुश्किल: ईरानी विदेश मंत्री से बात हुई, लेकिन लीडरशिप लेवल पर संपर्क मुश्किल है। हालात की वजह से दूतावास हाई अलर्ट पर हैं।

पीएम मोदी की निगरानी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहे हैं। संबंधित मंत्रालय समन्वय कर प्रभावी कदम उठा रहे हैं।

खास घटना: हिंद महासागर में फंसे एक ईरानी जहाज को भारत ने शरण दी, जिसके लिए ईरान ने धन्यवाद दिया।

भारत का रुख: किसी पक्ष का समर्थन या विरोध नहीं—शांति, स्थिरता और क्षेत्रीय संप्रभुता का सम्मान।

जयशंकर ने बयान के दौरान कहा कि संघर्ष तेजी से बढ़ रहा है, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता, सप्लाई चेन डिसरप्शन और नागरिकों की सुरक्षा पर खतरा है। विपक्ष ने पूर्ण चर्चा की मांग की, लेकिन सरकार ने बयान के जरिए स्थिति स्पष्ट की।

यह बयान भारत की तटस्थ और संतुलित विदेश नीति को दर्शाता है, जहां ऊर्जा सुरक्षा, नागरिकों की सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता पर फोकस है। स्थिति पर नजर बनी हुई है।

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