लोकसभा के ‘अहंकारी-उत्पाती’ छात्रों को संभालना जानते हैं ओम बिरला – पीएम मोदी ने की स्पीकर की दिल खोलकर तारीफ!
लोकसभा के ‘अहंकारी-उत्पाती’ छात्रों को संभालना जानते हैं ओम बिरला – पीएम मोदी ने की स्पीकर की दिल खोलकर तारीफ!
न्यूज़ अपडेट: 7 मार्च 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की जमकर तारीफ की और उन्हें सदन का “कुशल प्रधानाचार्य” बताया। पीएम ने कहा कि बिरला लोकसभा के “अहंकारी और उत्पाती छात्रों” (यानी विपक्ष के कुछ सांसदों) को ठीक से संभालना जानते हैं, चाहे वो किसी “बड़े परिवार” से ही क्यों न हों। यह बयान संसद के बजट सेशन के दौरान हाल की घटनाओं के संदर्भ में आया है, जहां विपक्षी सांसदों के हंगामे और स्पीकर चैंबर में घुसने की घटनाओं ने खूब सुर्खियां बटोरीं।
पीएम मोदी ने एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा: “कभी-कभी जब कुछ बड़े परिवारों से अहंकारी और उत्पाती छात्र आ जाते हैं, तब भी वे सभी को सदन के मुखिया की तरह संभालते हैं।” उन्होंने बिरला की संविधान के प्रति समर्पण और संसदीय आचरण की सराहना की, और कहा कि स्पीकर ने हमेशा सदन को गरिमा के साथ चलाया है। यह तारीफ ऐसे समय आई है जब हाल ही में कांग्रेस और अन्य विपक्षी सांसदों ने स्पीकर के चैंबर में घुसकर “अशोभनीय व्यवहार” किया था, जिसके चलते पीएम मोदी को लोकसभा में अपना भाषण रद्द करना पड़ा था।
बैकग्राउंड और घटनाक्रम:
हाल की घटनाएं: बजट सेशन में विपक्षी सांसदों (मुख्य रूप से कांग्रेस) ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान हंगामा किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 40-50 सांसद स्पीकर के चैंबर में घुस गए और “असभ्य तरीके” से बात की। स्पीकर ओम बिरला ने इसे “काला धब्बा” बताया और सदन को स्थगित कर दिया।
पीएम का फैसला: स्पीकर बिरला ने खुद पीएम मोदी को सदन न आने की सलाह दी, क्योंकि उन्हें “अप्रत्याशित घटना” की जानकारी थी। पीएम ने बाद में राज्यसभा में अपना भाषण दिया, जहां उन्होंने कांग्रेस पर राष्ट्रपति, दलितों, महिलाओं और सिख समुदाय का अपमान करने का आरोप लगाया।
विपक्ष की प्रतिक्रिया: कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने स्पीकर की निष्पक्षता पर सवाल उठाए और नो-ट्रस्ट मोशन लाने की धमकी दी। मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया।
पीएम मोदी की यह तारीफ ओम बिरला की सख्ती और निष्पक्षता को हाइलाइट करती है, जो 2019 से स्पीकर हैं और हाल के सेशनों में कई बार विपक्षी हंगामे पर सख्त रुख अपनाते दिखे हैं। संसद में ऐसे बयान राजनीतिक तनाव को और बढ़ा सकते हैं, खासकर लोकसभा चुनावों से पहले।
क्या लगता है आपको – पीएम की यह तारीफ विपक्ष पर निशाना है या स्पीकर की वाकई सराहना?
