राजनीति

नीतीश कुमार को लेकर JDU नेताओं और कार्यकर्ताओं में गुस्सा क्यों? जानिए असली वजह

नीतीश कुमार को लेकर JDU नेताओं और कार्यकर्ताओं में गुस्सा क्यों? जानिए असली वजह

पटना: बिहार की सियासत में तूफान मचा हुआ है! मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और सीएम पद छोड़ने की खबर से जनता दल (यूनाइटेड) में भारी असंतोष और गुस्सा फूट पड़ा है। कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ की, बर्तन फेंके, फर्नीचर तोड़ा, नारे लगाए और नेताओं के खिलाफ प्रदर्शन किया। कई जगहों पर भावुक कार्यकर्ता रोते हुए नजर आए। मुख्य गुस्से की वजहें ये हैं:

मुख्य कारण JDU में गुस्सा क्यों?

जनादेश का ‘धोखा’ महसूस होना: 2025 विधानसभा चुनाव में एनडीए को भारी बहुमत मिला था, और वो नीतीश कुमार के नाम और चेहरे पर था। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जनता ने नीतीश को बिहार में रखने के लिए वोट दिया, न कि दिल्ली भेजने के लिए। उनका राज्यसभा जाना “जनादेश का अपमान” और “बिहार छोड़कर भागना” जैसा लग रहा है।

पार्टी के बिखरने का डर: JDU की पूरी राजनीति और संगठन नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द सिमटा हुआ है। उनके बिना पार्टी ताश के पत्तों की तरह बिखर सकती है। कार्यकर्ताओं को लगता है कि नीतीश के जाने से जेडीयू की सियासी ताकत कमजोर होगी, और बीजेपी का दबदबा बढ़ेगा। कई नेता और कार्यकर्ता कह रहे हैं कि “नीतीश जी बिहार के हैं, उन्हें कहीं नहीं जाने देंगे”।

कुछ बड़े नेताओं पर ‘गद्दारी’ का आरोप: प्रदर्शनकारियों ने जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं जैसे ललन सिंह, संजय झा, विजय चौधरी आदि पर नारे लगाए और आरोप लगाया कि ये “बीजेपी के साथ मिलकर पार्टी को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं”। उन्हें “जयचंद” कहा जा रहा है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि ये नेता नीतीश को दबाव में डालकर दिल्ली भेज रहे हैं।

नीतीश के बेटे निशांत की एंट्री पर सवाल: कुछ कार्यकर्ता नीतीश के बेटे निशांत कुमार को राज्यसभा भेजने की मांग कर रहे हैं, लेकिन कई को लगता है कि नीतीश खुद क्यों जा रहे हैं? इससे पार्टी में वंशवाद का आरोप भी लग सकता है, जो नीतीश की पुरानी छवि के खिलाफ है।

भावनात्मक लगाव और भविष्य की अनिश्चितता: नीतीश ने 20+ साल बिहार की कमान संभाली है। कार्यकर्ताओं में उनके प्रति गहरा भावनात्मक लगाव है। उनका जाना पार्टी में अविश्वास और निराशा पैदा कर रहा है। कई जगह पोस्टकार्ड कैंपेन चल रहा है, जहां कार्यकर्ता नीतीश से “बिहार में रहने” की अपील कर रहे हैं।

क्या होगा आगे?

नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए नामांकन कर दिया है, लेकिन कार्यकर्ताओं का विरोध इतना तेज है कि पार्टी में बैठकें हो रही हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि गुस्से को देखकर फैसला बदला जा सकता है। RJD और विपक्ष इसे “बीजेपी द्वारा नीतीश को हाईजैक” बता रहा है।

JDU में ये उथल-पुथल 2025 चुनाव जीत के बाद पहली बड़ी चुनौती है। कार्यकर्ताओं का गुस्सा दिखाता है कि नीतीश की लोकप्रियता अभी भी पार्टी की जान है। क्या नीतीश फैसला बदलेंगे या बेटे को आगे लाकर पार्टी संभालेंगे? बिहार की सियासत में आगे क्या होगा, ये आने वाले दिन बताएंगे।

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