नीतीश कुमार की नई राजनीतिक पारी: 10 बार CM, 6 बार सांसद अब राज्यसभा में
बिहार की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक और युगांतकारी मोड़ आया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके अपनी इस पुरानी इच्छा को सार्वजनिक किया कि पिछले दो दशकों से अधिक समय से उनके मन में राज्यसभा सदस्य बनने की ख्वाहिश थी। आज बिहार विधानसभा परिसर में उन्होंने पर्चा भरा, जहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, साथ ही जेडीयू और एनडीए के अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। नामांकन के दौरान अमित शाह ने नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए कहा, “नीतीश जी ने बिहार को जंगल राज से मुक्त किया, सड़कों को गांव-गांव तक पहुंचाया। उनके कुर्ते पर कभी दाग नहीं लगा। उनका कार्यकाल ऐतिहासिक है।”
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर बिहार की सियासत का सबसे लंबा और सबसे प्रभावशाली अध्याय रहा है। वे 6 बार लोकसभा सांसद चुने गए हैं और 10 बार बिहार के मुख्यमंत्री बने हैं—यह राज्य के इतिहास में सबसे अधिक कार्यकाल है। 2005 से लगातार वे बिहार की कमान संभालते आए हैं, जहां उन्होंने विकास, कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे पर फोकस किया। अब राज्यसभा में जाने का फैसला उनकी राजनीतिक यात्रा में एक नया अध्याय शुरू कर रहा है। उन्होंने कहा, “बिहार की जनता ने मुझे लगातार विश्वास दिया। मैं पिछले 21 वर्षों से मुख्यमंत्री के रूप में सेवा कर रहा हूं। अब मैं राज्यसभा में जाकर राष्ट्रीय स्तर पर योगदान देना चाहता हूं। नई सरकार को मेरा पूरा मार्गदर्शन और सहयोग मिलेगा।”
इस फैसले के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। नीतीश कुमार ने खुद कहा कि वे संसद और विधानमंडल के सभी चार सदनों (लोकसभा, राज्यसभा, बिहार विधानसभा और विधान परिषद) का हिस्सा बनना चाहते थे—यह उनकी एक अधूरी ख्वाहिश थी, जो अब पूरी हो रही है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि स्वास्थ्य, उम्र और पार्टी में नई पीढ़ी को आगे लाने की सोच भी इसमें भूमिका निभा रही है। राज्यसभा चुनाव 16 मार्च को होने हैं, और एनडीए के मजबूत बहुमत के कारण नीतीश का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय है। नामांकन के बाद वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे, जिससे बिहार में नई सरकार का गठन होगा।
इस बदलाव से बिहार की सियासत में बड़ा उलटफेर हुआ है। एनडीए गठबंधन में अब बीजेपी का नेता मुख्यमंत्री बन सकता है—यह पहली बार होगा जब बीजेपी बिहार की कमान संभालेगी। चर्चा में कई नाम हैं, जैसे सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, नीतीश मिश्रा और अन्य वरिष्ठ बीजेपी नेता। जेडीयू से दो उप-मुख्यमंत्री बनने की संभावना है, ताकि गठबंधन का संतुलन बना रहे। कुछ सूत्रों का कहना है कि नीतीश के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री भी हो सकती है।
विपक्षी दल, खासकर RJD ने इस फैसले को “जनादेश का अपमान” बताया है। तेजस्वी यादव ने कहा कि नीतीश कुमार ने चुनाव में जनता से सीएम बनने का वादा किया था, अब दिल्ली चले गए। लेकिन एनडीए इसे राष्ट्रीय राजनीति में नीतीश की नई भूमिका के रूप में देख रहा है। अमित शाह ने कहा कि नीतीश कुमार राष्ट्रीय स्तर पर बिहार के विकास को आगे बढ़ाएंगे।
नीतीश कुमार का यह कदम बिहार की राजनीति में एक युग का अंत और नए युग की शुरुआत है। जहां एक तरफ उनके समर्थक भावुक हैं और कुछ नाराजगी जाहिर कर रहे हैं, वहीं राजनीतिक विश्लेषक इसे एक रणनीतिक कदम मान रहे हैं। राज्यसभा में जाकर वे केंद्र में बिहार के मुद्दों को मजबूती से उठा सकेंगे। बिहार अब नई सरकार और नए चेहरे के साथ आगे बढ़ेगा, लेकिन नीतीश का मार्गदर्शन बना रहेगा।
यह फैसला न केवल बिहार, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डालेगा। एनडीए की एकता और भविष्य की योजनाओं में नीतीश की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। बिहार की जनता अब इंतजार कर रही है कि नई सरकार कैसे बनेगी और राज्य का विकास किस दिशा में जाएगा। नीतीश कुमार की यह “नई पारी” निश्चित रूप से चर्चा का विषय बनी रहेगी।
