कोई छूट नहीं: रूस से भारत को Crude Oil फिर से मिलने लगेगा, लेकिन अधिक कीमत पर।
मिडल ईस्ट में ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के चलते होर्मुज स्ट्रेट में तेल सप्लाई बाधित होने से भारत को बड़ा संकट मंडरा रहा था, लेकिन अब अमेरिका ने 30 दिनों की अस्थायी छूट देकर राहत दी है। भारत अब फिर से रूस से क्रूड ऑयल खरीद सकता है, लेकिन अच्छी खबर के साथ बुरी खबर भी है – डिस्काउंट लगभग खत्म हो गया है!
पहले रूसी तेल ब्रेंट क्रूड से 9-11 डॉलर प्रति बैरल सस्ता मिलता था, लेकिन अब बाजार ‘सेलर्स मार्केट’ बन गया है। रूसी यूराल्स क्रूड अब ब्रेंट से सिर्फ 4-5 डॉलर सस्ता या कभी-कभी महंगा भी बिक रहा है। ट्रेडर्स मार्च-अप्रैल की डिलीवरी के लिए 4-5 डॉलर प्रीमियम पर बेच रहे हैं। मतलब, भारत को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है – छूट की जगह अब प्रीमियम!
मुख्य डिटेल्स:
अमेरिकी छूट: अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने X पर घोषणा की कि भारत को 30 दिनों की वेवर मिली है। यह उन कार्गो पर लागू है जो 5 मार्च 2026 से पहले लोड हुए और 4 अप्रैल तक भारत पहुंच जाएंगे। इससे समुद्र में फंसे 9.5 मिलियन बैरल रूसी तेल भारत आ सकता है।
रूस की तैयारी: रूस भारत को ज्यादा तेल डायवर्ट करने को तैयार है। रूसी डिप्टी PM अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा कि भारत से ‘रिन्यूड इंटरेस्ट’ के सिग्नल मिल रहे हैं। रूस भारत की 40% जरूरत पूरी कर सकता है।
कीमतों का असर: ब्रेंट क्रूड अब 80-83 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। डिस्काउंट कम होने से भारत का इम्पोर्ट बिल बढ़ सकता है। पहले रूस से सस्ता तेल मिलने से सालाना अरबों डॉलर बचते थे, अब वो बचत कम होगी।
भारत की स्थिति: भारत के पास सिर्फ 25 दिन का क्रूड स्टॉक है, और 40% तेल होर्मुज से आता है। इस छूट से फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रह सकती हैं, लेकिन लंबे समय में महंगाई का खतरा।
कंपनियां एक्टिव: IOCL, BPCL, HPCL और MRPL जैसी रिफाइनरीज ट्रेडर्स से बात कर रही हैं। कुछ ने नवंबर के बाद पहली बार रूसी तेल लेने की तैयारी की है।
यह फैसला मिडिल ईस्ट संकट के बीच आया है, जहां सप्लाई चेन टूटने से तेल कीमतें आसमान छू रही थीं। अमेरिका ने यह छूट इसलिए दी ताकि ग्लोबल मार्केट में तेल की कमी न हो और भारत जैसे बड़े इम्पोर्टर को राहत मिले। लेकिन डिस्काउंट खत्म होने से भारत को ‘ज्यादा कीमत’ पर समझौता करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर युद्ध लंबा चला तो रूस का डिस्काउंट और कम हो सकता है, और भारत को मिडिल ईस्ट या अमेरिका से महंगा तेल लेना पड़ेगा। फिलहाल 30 दिन की राहत है – आगे क्या होगा, यह युद्ध की दिशा पर निर्भर!
