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US-ईरान युद्ध का वैश्विक तेल बाजार पर बुरा असर: ब्रेंट क्रूड में 11% तक का उछाल, $85 के पार पहुंचा भाव

US-ईरान युद्ध का वैश्विक तेल बाजार पर बुरा असर: ब्रेंट क्रूड में 11% तक का उछाल, $85 के पार पहुंचा भाव

नई दिल्ली/दुबई, 5 मार्च 2026: मध्य पूर्व में अमेरिका और इज़राइल के ईरान पर हमलों के बाद शुरू हुए युद्ध ने वैश्विक तेल बाजार को हिला दिया है। ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) की कीमतों में पिछले कुछ दिनों में भारी उछाल आया है, जो सप्ताहांत के बाद ट्रेडिंग शुरू होने पर 11% तक पहुंच गया। एक समय पर ब्रेंट क्रूड $85 प्रति बैरल के ऊपर चला गया, जो जुलाई 2024 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।

युद्ध की शुरुआत में अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को प्रभावित किया गया—यह चोकपॉइंट दुनिया के लगभग 20% तेल व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है। ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने जहाजों पर हमले की धमकी दी, जिससे टैंकर ट्रैफिक ठप हो गया और शिपिंग बीमा रद्द हो गए। इससे तेल सप्लाई में बड़ा संकट पैदा हो गया।

बाजार के आंकड़ों के अनुसार:

ब्रेंट क्रूड में शुरुआती ट्रेडिंग में 10-13% तक का उछाल देखा गया, जो $82-85 के बीच पहुंचा।

बाद में कुछ सुधार के साथ यह $81-84 के आसपास ट्रेड कर रहा है, लेकिन कुल मिलाकर 11% से अधिक की बढ़त बनी हुई है।

अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 8-12% उछलकर $72-77 के बीच पहुंचा।

विश्लेषकों का कहना है कि अगर युद्ध लंबा चला और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहा, तो ब्रेंट क्रूड $100 से $150 प्रति बैरल तक जा सकता है। RBC और अन्य ब्रोकरेज ने चेतावनी दी है कि इससे वैश्विक महंगाई बढ़ेगी, रिसेशन का खतरा मंडराएगा, और विशेष रूप से एशिया जैसे तेल आयात करने वाले देश प्रभावित होंगे। भारत जैसे देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे आम आदमी पर बोझ पड़ेगा।

ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि हमले ईरान की नौसेना और हवाई क्षमता को कमजोर करने के लिए हैं, लेकिन ईरान की जवाबी कार्रवाई से संघर्ष फैल रहा है। OPEC+ ने उत्पादन बढ़ाने की कोशिश की है, लेकिन मध्य पूर्व की अस्थिरता से वैश्विक बाजार में घबराहट बनी हुई है।

यह स्थिति स्टॉक मार्केट्स पर भी असर डाल रही है, जहां शेयरों में गिरावट आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर संघर्ष जल्द खत्म नहीं हुआ, तो तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित होगी।

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