Friday, June 26, 2026
राष्ट्रीय

मिडिल ईस्ट संकट के बीच PM मोदी एक्टिव, 48 घंटे में 8 वर्ल्ड लीडर्स से की बात! भारत की डिप्लोमेसी फुल स्पीड में

मिडिल ईस्ट संकट के बीच PM मोदी एक्टिव, 48 घंटे में 8 वर्ल्ड लीडर्स से की बात! भारत की डिप्लोमेसी फुल स्पीड में

3 मार्च 2026: US-इज़राइल-ईरान युद्ध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिप्लोमेटिक फ्रंट पर जबरदस्त एक्टिविटी दिखाई है। पिछले 48 घंटों में उन्होंने 8 वेस्ट एशियन (मिडिल ईस्ट) देशों के लीडर्स से फोन पर बात की – UAE, इज़राइल, सऊदी अरब, जॉर्डन, बहरीन, ओमान, कुवैत और कतर। यह आउटरीच खासतौर पर गल्फ देशों में रहने वाले करीब 90 लाख भारतीयों की सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और हमलों की निंदा पर फोकस्ड रहा।

इन 8 लीडर्स से बात हुई:

UAE – प्रेसिडेंट शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (हमलों की निंदा, भारतीयों की सुरक्षा)

इज़राइल – पीएम बेंजामिन नेतन्याहू (शांति की अपील, “अर्ली सेसेशन ऑफ होस्टिलिटीज”, सिविलियन सेफ्टी पर जोर)

सऊदी अरब – क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (ईरानी हमलों की निंदा, भारतीय कम्युनिटी की वैलफेयर)

जॉर्डन – किंग अब्दुल्लाह II (क्षेत्रीय स्थिति पर चिंता, जॉर्डन के लोगों की सुरक्षा)

बहरीन – किंग हमाद बिन ईसा अल खलीफा (हमलों की निंदा, भारतीयों की देखभाल)

ओमान – सुल्तान हैथम बिन तारिक (ओमान की संप्रभुता का उल्लंघन निंदनीय, डायलॉग से शांति)

कुवैत – क्राउन प्रिंस शेख सबाह अल-खालिद अल-हमद अल-सबाह (हमलों पर चिंता, भारतीयों की सुरक्षा)

कतर – अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी (कतर की संप्रभुता का समर्थन, डायलॉग और डिप्लोमेसी पर जोर)

PM मोदी ने हर बातचीत में हमलों की निंदा की (खासकर ईरान के रिटेलिएटरी स्ट्राइक्स पर), शांति और डायलॉग की अपील की, और भारतीय डायस्पोरा की सुरक्षा पर फोकस किया। उन्होंने X (ट्विटर) पर भी इन बातचीतों के बारे में पोस्ट किए, जैसे ओमान और कतर के साथ “शांति बहाली के लिए सस्टेनड डिप्लोमेटिक एंगेजमेंट” की जरूरत बताई।

यह आउटरीच ऐसे समय में आया है जब युद्ध चौथे दिन में है, मौतें 800+ हो चुकी हैं, और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की धमकी से ऑयल प्राइस आसमान छू रहे हैं। भारत ने ईरान से डायरेक्ट बात नहीं की, जिस पर कांग्रेस (राहुल गांधी, सोनिया गांधी) ने सवाल उठाए हैं – लेकिन सरकार का फोकस भारतीयों की सेफ्टी और एनर्जी सप्लाई चेन पर है।

PM मोदी की यह एक्टिव डिप्लोमेसी दिखाती है कि भारत संकट में चुप नहीं बैठा – बल्कि क्षेत्रीय पार्टनर्स के साथ मजबूत संपर्क बनाए रख रहा है। क्या आपको लगता है यह आउटरीच शांति ला पाएगी, या और कदम उठाने चाहिए? कमेंट में बताएं!

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