‘बिहार के शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग’—होली से ठीक पहले चिराग पासवान ने उठाया मुद्दा, कहा कमियों को दूर कर सख्ती से लागू करें!
‘बिहार के शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग’—होली से ठीक पहले चिराग पासवान ने उठाया मुद्दा, कहा कमियों को दूर कर सख्ती से लागू करें!
पटना: होली के त्योहार से ठीक पहले बिहार की सियासत में शराबबंदी का मुद्दा फिर गरमाया है। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने रविवार को पटना पहुंचकर बिहार में 2016 से लागू एक दशक पुराने शराबबंदी कानून की समीक्षा (रिव्यू) की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य कानून को खत्म करना नहीं, बल्कि इसकी कमियों को पहचानकर इसे और अधिक प्रभावी व सख्त तरीके से लागू करना है।
चिराग पासवान ने मीडिया से बातचीत में कहा, “10 साल हो गए हैं, अब समय आ गया है कि हम देखें कि शराबबंदी के उद्देश्य पूरे हो रहे हैं या नहीं। जहरीली शराब अभी भी उपलब्ध है, मौतें हो रही हैं—यह दर्शाता है कि कहीं न कहीं लीकेज है। समीक्षा से कमियों को दूर किया जा सकता है और कानून को मजबूत बनाया जा सकता है।” उन्होंने जोर दिया कि गरीब और निर्दोष लोग जेल जा रहे हैं, जबकि असली दोषी बच निकलते हैं—इसलिए क्रियान्वयन पर फोकस जरूरी है।
यह बयान NDA के अंदर से आया है, जहां पहले भी जितन राम मांझी और कुछ JDU विधायकों ने समीक्षा की मांग की थी। हालांकि, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और JDU शराबबंदी को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं और इसे बनाए रखने पर अड़े हैं। चिराग का यह कदम होली के मौके पर राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि त्योहार के दौरान शराब की कालाबाजारी और जहरीली शराब से मौतों की खबरें अक्सर सामने आती हैं।
बिहार में शराबबंदी 2016 में लागू हुई थी, लेकिन पिछले सालों में हजारों मौतें जहरीली शराब से हुई हैं और करोड़ों लीटर अवैध शराब जब्त हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कानून के सख्त प्रावधानों (जैसे मौत पर फांसी तक) के बावजूद क्रियान्वयन में कमी है। चिराग की मांग से NDA में बहस तेज हो सकती है, खासकर जब विधानसभा सत्र चल रहा है।
फिलहाल, सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन NDA सहयोगी के इस बयान से बिहार की सियासत में नया मोड़ आ गया है। होली के रंग में राजनीति का रंग भी गहरा हो रहा है!
