राष्ट्रीय

खामेनेई की मौत पर यूपी में उबाल: सड़कों पर उतरा शिया समुदाय, अमेरिका-इजरायल के खिलाफ जोरदार नारेबाजी!

खामेनेई की मौत पर यूपी में उबाल: लखनऊ से गाजियाबाद, जौनपुर से अलीगढ़ तक सड़कों पर उतरा शिया समुदाय, अमेरिका-इजरायल के खिलाफ जोरदार नारेबाजी!

लखनऊ/नई दिल्ली: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले में मौत की खबर ने भारत में खासकर उत्तर प्रदेश के शिया समुदाय को गहरा सदमा पहुंचाया है। रविवार (1 मार्च 2026) से शुरू हुए विरोध-प्रदर्शन सोमवार को भी जारी हैं, जहां लखनऊ से लेकर गाजियाबाद, जौनपुर, अलीगढ़, संभल, प्रयागराज, बाराबंकी और अन्य जिलों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने खामेनेई को ‘शहीद’ बताते हुए अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ‘मुर्दाबाद’ के नारे लगाए, काले झंडे लहराए और उनके पोस्टर लेकर जुलूस निकाले।

प्रमुख शहरों में क्या हुआ?

लखनऊ: सबसे बड़ा केंद्र रहा। छोटा इमामबाड़ा, बड़ा इमामबाड़ा और रूमी गेट इलाके में हजारों शिया समुदाय के लोग जमा हुए। पुराने शहर में जुलूस निकाले गए, जहां महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। मौलाना कल्बे जव्वाद और अन्य उलेमा ने तीन दिन का शोक घोषित किया। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका-इजरायल को ‘आतंकवादी’ करार दिया और भारत से ईरान के साथ खड़े होने की मांग की। पुलिस ने भारी बल तैनात किया, लेकिन प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा।

अलीगढ़: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के पास और शहर के विभिन्न इलाकों में जुलूस निकाले गए। अलीगढ़ मुस्लिम फ्रेटरनिटी ने अमेरिका-इजरायल के खिलाफ नारेबाजी की। इमामबाड़ों से शुरू होकर सड़कों पर फैला आक्रोश।

जौनपुर: पंडरिबा के इमामबाड़ा से जुलूस निकला, जिसमें महिलाएं भी शामिल थीं। प्रदर्शनकारियों ने खामेनेई की तस्वीरें उठाईं और हमले की कड़ी निंदा की।

गाजियाबाद और अन्य: गाजियाबाद में भी विरोध जताया गया, जबकि संभल, अमरोहा, सहारनपुर, आगरा और प्रयागराज में शोक सभाएं और छोटे-बड़े जुलूस देखे गए। कई जगहों पर पुतले फूंके गए और ज्ञापन सौंपे गए।

यूपी पुलिस ने पूरे प्रदेश में हाई अलर्ट जारी किया है। डीजीपी राजीव कृष्ण ने बताया कि शिया बहुल इलाकों में विशेष निगरानी बढ़ाई गई है, सोशल मीडिया पर भी पैनी नजर रखी जा रही है। प्रदर्शन अब तक शांतिपूर्ण हैं, लेकिन भावनाएं उफान पर हैं। शिया संगठनों ने इसे ‘मानवता के लिए बड़ा नुकसान’ बताया और वैश्विक शांति की अपील की।

खामेनेई की मौत (86 वर्ष की उम्र में) ने ईरान में 40 दिनों का शोक शुरू कर दिया है, और भारत में शिया समुदाय इसे ‘शहादत’ मान रहा है। लखनऊ को ‘मिनी ईरान’ कहे जाने की वजह से यहां सबसे ज्यादा असर दिखा। स्थिति पर नजर रखी जा रही है—कहीं हिंसा न फैले, इसकी चिंता बनी हुई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *