कांग्रेस ने खामेनेई की ‘लक्षित हत्या’ की कड़ी निंदा की, कहा- संयुक्त राष्ट्र चार्टर का घोर उल्लंघन
नई दिल्ली: कांग्रेस ने रविवार को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की ‘लक्षित हत्या’ की कड़ी निंदा की है। पार्टी ने इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन बताते हुए ईरान के लोगों और दुनिया भर के शिया समुदाय के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
कांग्रेस के बयान में कहा गया कि भारत की विदेश नीति संविधान के अनुच्छेद 51 पर आधारित है, जो बातचीत से विवादों का शांतिपूर्ण समाधान, सभी देशों की समानता, दूसरे देशों में दखल न देना और शांति को बढ़ावा देने पर जोर देती है। पार्टी ने इसे वसुधैव कुटुंबकम के विचार, महात्मा गांधी की अहिंसा और जवाहरलाल नेहरू की गुटनिरपेक्षता की नीति के खिलाफ बताया।
संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह हमला संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन है, जो किसी देश की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बल प्रयोग या धमकी को प्रतिबंधित करता है। साथ ही अनुच्छेद 2(7) का भी उल्लंघन, जो आंतरिक मामलों में दखल को रोकता है। पार्टी ने कहा, “किसी बैठे हुए राष्ट्राध्यक्ष की लक्षित हत्या संप्रभुता पर हमला है और राजनीतिक वैधता ताकत से नहीं बनाई जा सकती। हर देश के नागरिकों को अपना भविष्य खुद तय करने का अटूट अधिकार है। बाहरी ताकतों को सरकार बदलने या नेता चुनने का हक नहीं।”
खामेनेई की मौत और क्षेत्रीय तनाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी सरकारी मीडिया ने खामेनेई की मौत की पुष्टि की है। ईरान ने हमले में खामेनेई की बेटी, पोते, बहू और दामाद सहित कई परिवारजनों की मौत की जानकारी दी। ईरान ने 40 दिनों का सार्वजनिक शोक घोषित किया है।
हमले ऑपरेशन एपिक फ्यूरी (अमेरिका) और ऑपरेशन रोरिंग लायन (इजरायल) के तहत शनिवार को शुरू हुए, जिसमें ईरान के कई सैन्य और परमाणु ठिकाने निशाना बने। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी सैनिकों वाले 27 ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, साथ ही तेल अवीव पर भी अटैक किया। हमलों की खबरें दुबई, दोहा, बहरीन, कुवैत समेत खाड़ी देशों से आई हैं। ईरान ने ‘सबसे विनाशकारी हमला’ करने की कसम खाई है।
अमेरिकी सेना ने पुष्टि की कि ऑपरेशन में अब तक 3 अमेरिकी सैनिक शहीद हुए और 5 घायल हैं। क्षेत्र में तनाव चरम पर है, और वैश्विक स्तर पर युद्ध फैलने की आशंका बढ़ गई है। कांग्रेस ने ऐसे एकतरफा रवैये को ‘साम्राज्यवाद’ करार देते हुए शांतिपूर्ण समाधान की मांग की है। क्या यह संघर्ष बड़ा युद्ध बन जाएगा? मध्य पूर्व की स्थिति पर सबकी नजर टिकी है।
