1200 बम, 200 फाइटर जेट्स, 500 टारगेट: US-इजरायल ने ‘मिशन खामेनेई’ को ऐसे अंजाम दिया
नई दिल्ली, 1 मार्च 2026: अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर संयुक्त हवाई हमला कर इतिहास रच दिया। इस ऑपरेशन में 200 से अधिक फाइटर जेट्स ने ईरान के 500 से ज्यादा लक्ष्यों पर हमला किया, जिसमें 1200 से अधिक बम और मिसाइलें दागी गईं। इस ‘मिशन खामेनेई’ का मुख्य उद्देश्य ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को निशाना बनाना था, और इजरायली सेना के अनुसार खामेनेई उनके तेहरान स्थित कंपाउंड पर हुए हमले में मारे गए।
इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने इसे अपनी वायुसेना के इतिहास का सबसे बड़ा एयर ऑपरेशन बताया। हमलों में ईरान की एयर डिफेंस सिस्टम, बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर, न्यूक्लियर और मिलिट्री साइट्स को टारगेट किया गया। अमेरिका ने भी टॉमहॉक मिसाइलों और F-22 स्टेल्थ फाइटर जेट्स से सपोर्ट दिया, जिससे ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा।
ईरानी राज्य मीडिया ने खामेनेई की मौत की पुष्टि की है। ईरान ने 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है। हमलों में 200 से अधिक लोग मारे गए, जिसमें कई सीनियर कमांडर शामिल हैं, जैसे रेवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रमुख और डिफेंस मिनिस्टर।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे “मध्य पूर्व में शांति” के लिए जरूरी बताया और कहा कि हमले जारी रहेंगे। ट्रंप ने ईरानी लोगों से अपील की कि वे इस मौके पर रिजीम को उखाड़ फेंकें। इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने भी खामेनेई के कंपाउंड के तबाह होने की पुष्टि की।
ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इजरायल और खाड़ी देशों में अमेरिकी बेसेज पर मिसाइलें दागीं, जिससे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया। दुबई, दोहा और तेल अवीव में सायरन बजे, और कई जगह विस्फोटों की खबरें आईं। ईरान ने “सबसे विनाशकारी” जवाब की धमकी दी है, जबकि ट्रंप ने चेतावनी दी कि कोई भी जवाब “कभी न देखी गई ताकत” से दिया जाएगा।
यह हमला महीनों की प्लानिंग का नतीजा है, जिसका लक्ष्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिलिट्री को नेस्तनाबूद करना था। मध्य पूर्व में अब बड़े युद्ध का खतरा मंडरा रहा है, और तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है। स्थिति अत्यंत अस्थिर बनी हुई है।
