AI समिट शर्टलेस प्रोटेस्ट केस: कांग्रेस को बड़ी राहत! यूथ प्रेसिडेंट उदय भानु चिब को मिली जमानत, पुलिस की 7 दिन रिमांड याचिका खारिज
AI समिट शर्टलेस प्रोटेस्ट केस: कांग्रेस को बड़ी राहत! यूथ प्रेसिडेंट उदय भानु चिब को मिली जमानत, पुलिस की 7 दिन रिमांड याचिका खारिज
नई दिल्ली: इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब को AI इम्पैक्ट समिट के दौरान हुए ‘शर्टलेस’ विरोध प्रदर्शन मामले में बड़ी राहत मिली है। दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट के ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने 28 फरवरी 2026 को उन्हें जमानत दे दी। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की 7 दिन की अतिरिक्त पुलिस रिमांड की मांग को खारिज कर दिया, क्योंकि पुलिस ठोस आधार नहीं दे सकी।
जमानत की शर्तें
₹50,000 के निजी मुचलके (personal bond) पर जमानत मंजूर।
उदय भानु चिब को अपना पासपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज (मोबाइल आदि) कोर्ट में सरेंडर करने होंगे।
कुछ रिपोर्ट्स में सूट्टी बॉन्ड की जांच के लिए कल (1 मार्च) तक रिपोर्ट मांगी गई है, और इस दौरान उन्हें न्यायिक हिरासत में रखा गया था, लेकिन जमानत मंजूर होने के बाद रिहाई हो गई।
मामले की पृष्ठभूमि
20 फरवरी 2026 को भारत मंडपम में इंडिया AI इम्पैक्ट समिट के दौरान इंडियन यूथ कांग्रेस के सदस्यों ने शर्टलेस प्रोटेस्ट किया।
उन्होंने टी-शर्ट पहने थे जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीरें और सरकार विरोधी, भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ स्लोगन थे।
प्रोटेस्ट के दौरान शर्ट उतारकर विरोध जताया गया, जिसे पुलिस ने अवैध और राष्ट्र-विरोधी बताया।
पुलिस का आरोप: उदय भानु चिब मुख्य साजिशकर्ता (main conspirator और mastermind) थे। उनके साथ श्री कृष्ण हरि, कुंदन यादव, नरसिम्हा यादव, अजय कुमार यादव आदि शामिल थे। पुलिस ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर हमला किया, दंगा फैलाने की कोशिश की और एंटी-नेशनल स्लोगन लगाए।
चिब को 26 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था। पहले 4 दिन की पुलिस कस्टडी मिली थी।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
कांग्रेस ने इस गिरफ्तारी को असंवैधानिक और राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया था। जमानत मिलने पर पार्टी ने इसे बड़ी जीत करार दिया।
कोर्ट का तर्क
कोर्ट ने कहा कि आरोपी इंडियन यूथ कांग्रेस के नेशनल प्रेसिडेंट हैं, समाज में मजबूत जड़ें हैं, इसलिए फ्लाइट रिस्क नहीं है। आर्टिकल 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का हवाला देते हुए कहा गया कि केवल अनुमानों पर स्वतंत्रता नहीं छीनी जा सकती।
यह मामला राजनीतिक विवाद का केंद्र बना हुआ है। पुलिस जांच जारी है, लेकिन जमानत से कांग्रेस को बड़ा मनोबल मिला है। क्या यह प्रोटेस्ट फ्री स्पीच का मामला था या अवैध गतिविधि? बहस जारी रहेगी।
