राष्ट्रीय

ईरान-इजरायल युद्ध का भारत पर असर: अर्थव्यवस्था, महंगाई और व्यापार पर क्या पड़ सकता है भारी बोझ?

ईरान-इजरायल युद्ध का भारत पर असर: अर्थव्यवस्था, महंगाई और व्यापार पर क्या पड़ सकता है भारी बोझ?

नई दिल्ली: US-इजरायल के ईरान पर बड़े हमलों और ईरान के जवाबी मिसाइल अटैक के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है। यह संघर्ष भारत की अर्थव्यवस्था, महंगाई और व्यापार पर सीधा असर डाल सकता है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा क्रूड ऑयल आयातक है (लगभग 85-90% तेल आयात करता है), और इसका बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट (इराक, सऊदी, UAE, कुवैत आदि) से आता है, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता है। यह चोकपॉइंट वैश्विक तेल सप्लाई का 20% हैंडल करता है।

मुख्य असर क्या-क्या हो सकते हैं?

1. क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल (Oil Price Spike)

वर्तमान में Brent क्रूड करीब $72-73 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है (28 फरवरी 2026 तक), जो साल की शुरुआत से 20% ऊपर है।

अगर संघर्ष लंबा चला या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कोई डिसरप्शन हुआ (ईरान ब्लॉक करने की धमकी दे चुका है), तो कीमतें $80-100 या इससे ज्यादा ($120-150 तक एक दिन के ब्लॉकेड में) पहुंच सकती हैं।

भारत का तेल आयात बिल (2025 में करीब $137 बिलियन) और बढ़ेगा, जो करंट अकाउंट डेफिसिट को चौड़ा करेगा और रुपए पर दबाव डालेगा।

2. महंगाई में तेजी (Inflation Surge)

हर $10 प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत की महंगाई 0.4% तक बढ़ सकती है और GDP ग्रोथ 0.3% तक कम हो सकती है।

पेट्रोल-डीजल, ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और फूड प्राइसेज बढ़ेंगे।

अगर तेल $100 तक पहुंचा, तो ग्लोबल इन्फ्लेशन में 0.6-0.7% का एडिशन हो सकता है, भारत में यह और ज्यादा प्रभाव डालेगा क्योंकि हम इंपोर्ट पर निर्भर हैं।

RBI को इंटरेस्ट रेट कट्स रोकने या बढ़ाने पड़ सकते हैं, जिससे ग्रोथ पर असर।

3. व्यापार और सप्लाई चेन पर असर (Trade & Supply Chain Disruptions)

होर्मुज या रेड सी रूट्स प्रभावित होने से शिपिंग कॉस्ट बढ़ेगी, इंश्योरेंस प्रीमियम ऊपर जाएगा।

भारत के यूरोप-अमेरिका एक्सपोर्ट में देरी, खासकर अगर रेड सी/सुएज प्रभावित हुआ।

भारत-Middle East-Europe कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट्स प्रभावित हो सकते हैं।

रूसी तेल इंपोर्ट पहले से कम हो रहा है (US सैंक्शंस के कारण), अब मिडिल ईस्ट डिसरप्शन से अल्टरनेटिव्स महंगे पड़ेंगे।

4. अन्य प्रभाव

फिस्कल डेफिसिट बढ़ सकता है (सरकार को फ्यूल सब्सिडी बढ़ानी पड़ सकती है या इंफ्रा स्पेंडिंग कम करनी पड़ सकती है)।

रुपया कमजोर होगा, डॉलर की डिमांड बढ़ेगी।

पॉजिटिव साइड: भारत ने पिछले सालों में तेल सोर्स डाइवर्सिफाई किया है (US, अफ्रीका, वेनेजुएला से ज्यादा इंपोर्ट), और स्ट्रैटेजिक रिजर्व्स हैं, लेकिन 40-50% तेल अभी भी होर्मुज से आता है।

संभावित परिदृश्य

माइल्ड एस्केलेशन: कीमतें $80 तक, महंगाई में 0.5-1% एडिशन, ग्रोथ पर हल्का असर।

सीरियस डिसरप्शन (होर्मुज ब्लॉक): कीमतें $100+, महंगाई 2-3% ऊपर, GDP ग्रोथ 0.5-1% कम, बड़ा इकोनॉमिक शॉक।

यह स्थिति तेजी से बदल रही है। भारत सरकार और RBI नजर बनाए हुए हैं, लेकिन लंबा संघर्ष भारत के लिए “नाइटमेयर सिनेरियो” बन सकता है। तेल की कीमतें और महंगाई पर नजर रखें – घरेलू खर्च और निवेश पर असर पड़ सकता है!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *