शराब घोटाले में केजरीवाल बरी! राउज एवेन्यू कोर्ट ने सभी आरोप खारिज किए, CBI को झटका; केजरीवाल रो पड़े, बोले- ‘मैं कट्टर ईमानदार हूँ’
शराब घोटाले में केजरीवाल बरी! राउज एवेन्यू कोर्ट ने सभी आरोप खारिज किए, CBI को झटका; केजरीवाल रो पड़े, बोले- ‘मैं कट्टर ईमानदार हूँ’
दिल्ली के कथित शराब घोटाले (दिल्ली एक्साइज पॉलिसी केस) में बड़ा फैसला आया है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने आज पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और कुल 23 आरोपियों को सभी आरोपों से बरी (discharged/acquitted) कर दिया है। स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने लगभग 600 पन्नों के आदेश में कहा कि CBI के पास कोई ठोस सबूत नहीं है, कोई रिश्वत या quid pro quo साबित नहीं हुआ, और कोई “ओवरआर्किंग कांस्पिरेसी” या “क्रिमिनल इंटेंट” नहीं पाया गया। कोर्ट ने CBI की जांच में लापरवाही और “साजिश की कहानी” गढ़ने पर भी फटकार लगाई।
यह फैसला AAP के लिए बड़ी राजनीतिक जीत है, क्योंकि केजरीवाल ने इसे “सत्य की जीत” और “भारत के इतिहास का सबसे बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र” बताया। फैसले के बाद केजरीवाल भावुक हो गए, फफक-फफक कर रो पड़े और कहा:
“कोर्ट ने सभी आरोप खारिज कर दिए… केजरीवाल भ्रष्ट नहीं है। मैं कट्टर ईमानदार हूँ।”
“BJP ने AAP को खत्म करने के लिए फर्जी केस बनाया… मोदी-शाह ने मिलकर साजिश रची।”
उन्होंने PM मोदी को चैलेंज दिया: “अगर BJP दिल्ली में 10 से ज्यादा सीटें जीत ले तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा। नई दिल्ली चुनाव करवाइए!”
कोर्ट ने क्या-क्या कहा? मुख्य बातें:
आरोपों के समर्थन में कोई पर्याप्त या ठोस सबूत नहीं।
केजरीवाल को कोई पैसे या फायदा मिलने का कोई डॉक्यूमेंट्री/इलेक्ट्रॉनिक सबूत नहीं।
पॉलिसी अप्रूवल से क्रिमिनल लायबिलिटी नहीं बनती बिना डिशॉनेस्ट इंटेंशन के।
CBI की चार्जशीट में कमी, हियरसे एविडेंस पर निर्भरता और जांच में लापरवाही।
सभी 23 आरोपी (कविता, बिजय नायर, दुर्गेश पाठक आदि सहित) बरी।
CBI का रिएक्शन: CBI ने फैसले को चुनौती देने का ऐलान किया है और दिल्ली हाईकोर्ट में अपील करने की तैयारी है। CBI का कहना है कि कोर्ट ने जांच के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं को “इग्नोर” किया।
केस की पृष्ठभूमि (संक्षेप में):
2021-22 की दिल्ली एक्साइज पॉलिसी में कथित घोटाला, जिसमें प्राइवेट कंपनियों को फायदा पहुंचाने और 12% मार्जिन फिक्स करने का आरोप।
केजरीवाल को मार्च 2024 में गिरफ्तार किया गया था, 5 महीने जेल में रहे, फिर बेल मिली।
सिसोदिया 17 महीने जेल में रहे।
ED और CBI दोनों ने जांच की, लेकिन अब ट्रायल कोर्ट ने केस को ही खारिज कर दिया।
फैसले के बाद AAP समर्थकों में जश्न का माहौल है, जबकि BJP इसे “लोअर कोर्ट का फैसला” बताकर हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कर रही है। क्या यह केस राजनीतिक बदले की कार्रवाई था या अब सच्चाई सामने आई? कमेंट में अपनी राय बताएं!
