कनाडाई PM मार्क कार्नी की भारत यात्रा: पंजाब का दौरा रद्द, ट्रूडो की पुरानी गलतियों से सबक?
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी भारत आ रहे हैं, लेकिन इस बार का दौरा काफी अलग है – वे पंजाब नहीं जाएंगे! यह दशकों पुरानी परंपरा से बड़ा बदलाव है, जहां पूर्व पीएम जस्टिन ट्रूडो (2018) और स्टीफन हार्पर ने हमेशा गोल्डन टेम्पल (अमृतसर) का दौरा किया था।
कार्नी का दौरा 27 फरवरी से 2 मार्च तक चलेगा, जिसमें मुंबई और नई दिल्ली में व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, AI, क्रिटिकल मिनरल्स और व्यापक व्यापार समझौते (CEPA) पर फोकस रहेगा। दोनों देशों के बीच पिछले सालों में खराब हुए रिश्तों को “रीसेट” करने का यह बड़ा कदम माना जा रहा है।
क्यों नहीं जा रहे पंजाब?
कार्नी का दौरा पूरी तरह बिजनेस-ओरिएंटेड है – कोई टूरिस्ट स्पॉट, कोई धार्मिक स्थल या सिख कम्युनिटी को सिंबॉलिक नोड नहीं।
कनाडाई अधिकारियों ने कहा, “हम पिछले दौरों से सबक लेते हैं।” ट्रूडो के 2018 दौरे में कई विवाद हुए थे, जैसे खालिस्तानी से जुड़े लोगों की मौजूदगी और “कल्चरल मिस”।
खालिस्तान मुद्दा और हरदीप सिंह निज्जर हत्याकांड (2023) के आरोपों से रिश्ते बिगड़े थे। अब कार्नी सरकार ने साफ कहा है कि कनाडा में हिंसक अपराधों से भारत का कोई लिंक नहीं मानते – यह ट्रूडो के समय के आरोपों से पीछे हटने का संकेत है।
पंजाब (और गोल्डन टेम्पल) का दौरा छोड़कर कार्नी ने घरेलू राजनीति (कनाडा में सिख डायस्पोरा और वोट बैंक) को साइड रखा और भारत के साथ आर्थिक साझेदारी को प्राथमिकता दी।
मुख्य हाइलाइट्स:
ट्रेड और डील्स: यूरेनियम, हेवी क्रूड ऑयल, न्यूक्लियर, AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और एजुकेशन पर बड़े समझौते संभावित।
रीसेट का संकेत: ट्रूडो के “घोस्ट” को दफनाते हुए कार्नी ने मोदी को G7 में इनवाइट किया था, अब यह दौरा रिश्तों को नई ऊंचाई देगा।
ट्रूडो की गलतियों से सबक? कई विश्लेषक इसे ट्रूडो के विवादास्पद दौरे (2018) और निज्जर मामले के बाद की गलतियों से सीख मान रहे हैं। कार्नी ने कहा, “हम मिडिल-पावर कंट्रीज के साथ प्रैग्मैटिक रिलेशन बनाना चाहते हैं।”
यह दौरा भारत-कनाडा रिश्तों में नया अध्याय खोल सकता है – जहां राजनीति से ज्यादा अर्थव्यवस्था और विश्वास पर फोकस है। कार्नी मुंबई से शुरू करेंगे और दिल्ली में पीएम मोदी से मुलाकात करेंगे।
