पीएम मोदी ने नेसेट में कहा – भारत इजरायल के साथ मजबूती से खड़ा है, गाजा शांति का समर्थन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 फरवरी 2026 को इजरायल की संसद नेसेट (Knesset) में ऐतिहासिक संबोधन दिया। वे पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने जिन्होंने नेसेट को संबोधित किया। संबोधन के दौरान उन्हें ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ (Knesset का सर्वोच्च सम्मान) प्रदान किया गया, जो उनके व्यक्तिगत नेतृत्व से भारत-इजरायल रिश्तों को मजबूत करने के लिए दिया गया।
यह संबोधन स्पेशल प्लेनरी सेशन में हुआ, जहां इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू, स्पीकर अमीर ओहाना, विपक्षी नेता यैर लापिड आदि मौजूद थे। मोदी को खड़ा होकर तालियां बजाई गईं और स्टैंडिंग ओवेशन मिला।
पीएम मोदी के संबोधन के मुख्य पॉइंट्स और महत्वपूर्ण उद्धरण (अभी तक उपलब्ध अपडेट्स के आधार पर):
भारत-इजरायल दोस्ती का ऐतिहासिक और सभ्यतागत आधार
मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध 3000 साल पुराने हैं। उन्होंने बुक ऑफ एस्थर और तालमुद का जिक्र किया।
भारत में यहूदी समुदाय सदियों से बिना डर के रहता आया है।
“I was born on the same day that India formally recognised Israel on September 17, 1950.” (मैं उसी दिन पैदा हुआ जिस दिन भारत ने इजरायल को औपचारिक मान्यता दी।)
7 अक्टूबर हमले पर गहरा दुख और एकजुटता
“I carry with me the deepest condolences of the people of India for every life lost and for every family whose world was shattered in the barbaric terrorist attack by Hamas on October 7.”
“We feel your pain, we share your grief. India stands with Israel firmly with full conviction in this moment and beyond.”
उन्होंने 26/11 मुंबई हमलों में इजरायली नागरिकों के नुकसान को याद किया और कहा कि भारत आतंकवाद को कभी बर्दाश्त नहीं करता।
“Terror anywhere threatens peace everywhere.” (कहीं भी आतंक कहीं भी शांति को खतरा है।)
“Our policy is zero tolerance for terrorism, regardless of the source.” (हमारी नीति आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस है, चाहे स्रोत कोई भी हो।)
शांति और गाजा पर भारत का रुख
मोदी ने गाजा पीस इनिशिएटिव (UN सिक्योरिटी काउंसिल द्वारा एंडोर्स्ड) का समर्थन दोहराया।
कहा कि यह “just and durable peace” (न्यायपूर्ण और स्थायी शांति) का रास्ता है, जिसमें फिलिस्तीन मुद्दे को भी संबोधित किया जाए।
“India joins Israel and the world for dialogue, peace and stability in the region.”
हिंसा खत्म करने, शांति बहाल करने और क्षेत्र में स्थिरता के लिए भारत प्रतिबद्ध है। मानवीय सहायता, संवाद और सभी पक्षों के साथ काम करने पर जोर दिया।
दोनों देशों की साझेदारी और भविष्य
भारत और इजरायल “trusted partners” हैं, जिनके रिश्ते ट्रेड, सिक्योरिटी, डिफेंस के लिए vital हैं।
AI, क्वांटम टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, साइबर सिक्योरिटी, डिफेंस, एग्रीकल्चर, वॉटर मैनेजमेंट आदि क्षेत्रों में synergy की तारीफ की।
“We are committed to further consolidating this relationship across many sectors.”
प्राचीन संबंधों को “blood and sacrifice” से जोड़ा – प्रथम विश्व युद्ध में भारतीय सैनिकों के बलिदान का जिक्र (जो उस क्षेत्र में लड़े थे)।
अन्य महत्वपूर्ण बातें
मोदी ने कहा कि वे 1.4 अरब भारतीयों की ओर से सम्मान और साझेदारी का संदेश लेकर आए हैं।
9 साल बाद इजरायल की यह दूसरी आधिकारिक यात्रा है।
नेसेट में संबोधन करने वाले वे 19वें विदेशी संसद को एड्रेस करने वाले भारतीय नेता बने।
अतिरिक्त अपडेट्स (25 फरवरी 2026 शाम तक):
नेसेट स्पीकर अमीर ओहाना ने मोदी की लीडरशिप की तारीफ की और कहा कि यह सम्मान उनके योगदान के लिए है।
नेतन्याहू ने मोदी को “brother” कहा और “Modi hug” का जिक्र किया, भारत को “gigantic power” बताया।
विपक्षी नेता यैर लापिड ने भी मोदी का स्वागत किया, लेकिन कुछ मुद्दों (जैसे सुप्रीम कोर्ट प्रेसिडेंट को न आमंत्रित करने) पर विपक्ष ने वॉकआउट किया – हालांकि लापिड ने स्पष्ट किया कि यह मोदी से संबंधित नहीं है।
MEA और विभिन्न रिपोर्ट्स में संबोधन को “firm stance on terror” और “balanced peace support” के रूप में देखा जा रहा है।
यह संबोधन भारत की स्वतंत्र विदेश नीति, आतंकवाद विरोध और क्षेत्रीय शांति के प्रति संतुलित रुख को दर्शाता है। पूरी यात्रा में डिफेंस, टेक्नोलॉजी और ट्रेड पर फोकस है।
