भोजशाला में मंदिर के पक्के सबूत: ASI रिपोर्ट में भगवान शिव, वासुकी नाग समेत कई मूर्तियों का खुलासा; मस्जिद को लेकर क्या कहा?
भोजशाला में मंदिर के पक्के सबूत: ASI रिपोर्ट में भगवान शिव, वासुकी नाग समेत कई मूर्तियों का खुलासा; मस्जिद को लेकर क्या कहा?
मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की लंबे समय से प्रतीक्षित रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। ASI ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट (लगभग 2100 पेज) मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में पेश की, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मौजूदा संरचना प्राचीन मंदिरों के अवशेषों से बनी है और यह 11वीं-12वीं शताब्दी का मंदिर रहा होगा।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:
मंदिर के अवशेष: ASI ने पाया कि वर्तमान ढांचा पुराने मंदिरों के हिस्सों, स्तंभों, शिल्प और शिलालेखों से मिलकर बनाया गया है। निर्माण में संतुलन या एकरूपता नहीं दिखती, जो बाद में किया गया संकेत देता है।
मूर्तियां और कलाकृतियां: सर्वे के दौरान 97 हिंदू मूर्तियां और टुकड़े मिले, जिनमें भगवान शिव (नटराज या जटाधारी रूप), वासुकी नाग (सात फन वाला सर्प), गणेश, ब्रह्मा, नरसिंह, भैरव, हनुमान, कृष्ण, सरस्वती (वाग्देवी) और अन्य देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां शामिल हैं। कुल 94 मूर्तियां/कलाकृतियां और 39 टूटी हुई मूर्तियां दर्ज की गईं।
शिलालेख: दीवारों और खंभों पर 12वीं सदी के संस्कृत और प्राकृत शिलालेख मिले, जिनमें राजा भोज के समय की काव्य रचनाएं, व्याकरण सूत्र और “ओम नमः शिवाय”, “सीता-राम” जैसे उल्लेख हैं। फारसी/अरबी शिलालेख बाद के हैं।
अन्य प्रमाण: बलि स्थलों जैसी संरचनाएं, पशु-मानव आकृतियां (जो मस्जिद शैली में असामान्य हैं), और कुल 1700+ अवशेष (सिक्के, सिक्के आदि) मिले।
मस्जिद को लेकर ASI का क्या कहना?
रिपोर्ट में स्पष्ट है कि कमाल मौला मस्जिद का निर्माण 14वीं-15वीं शताब्दी में हुआ (कुछ स्रोतों में 1265 ईस्वी का उल्लेख), जो प्राचीन मंदिर के अवशेषों का उपयोग करके किया गया। इसमें इस्लामी वास्तुकला जैसे मेहराब, मिहराब और मीनार के तत्व हैं, लेकिन मूल ढांचा हिंदू मंदिर का है। ASI ने संकेत दिया कि यह स्थल मूल रूप से देवी सरस्वती (वाग्देवी) को समर्पित मंदिर/विश्वविद्यालय रहा होगा, जैसा हिंदू पक्ष दावा करता है।
हाईकोर्ट ने रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लिया और दोनों पक्षों (हिंदू और मुस्लिम) को दो हफ्तों में आपत्तियां, सुझाव या सिफारिशें दाखिल करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट पहले लीक होने की वजह से चर्चा में थी, और अब कोर्ट में पेश होने से विवाद और तेज हो गया है। हिंदू पक्ष इसे “मंदिर के सबूत” मान रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
यह मामला 2003 के ASI आदेश (वसंत पंचमी पर हिंदू पूजा, शुक्रवार पर नमाज) से जुड़ा है और आगे की सुनवाई में बड़ा फैसला आ सकता है।
