सुप्रीम कोर्ट में WhatsApp का बड़ा यू-टर्न: अब आपकी स्पष्ट मंजूरी के बिना Meta से डेटा शेयर नहीं होगा – यूजर कंसेंट पर सहमति
सुप्रीम कोर्ट में WhatsApp का बड़ा यू-टर्न: अब आपकी स्पष्ट मंजूरी के बिना Meta से डेटा शेयर नहीं होगा – यूजर कंसेंट पर सहमति
सुप्रीम कोर्ट में चल रही लंबी कानूनी लड़ाई के बाद WhatsApp (Meta की कंपनी) ने आज (23 फरवरी 2026) बड़ा यू-टर्न लिया है। कंपनी ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी के तहत यूजर डेटा को Meta की अन्य कंपनियों के साथ शेयर करने के लिए अब यूजर की स्पष्ट सहमति (opt-in/consent-based mechanism) जरूरी होगी। बिना मंजूरी के कोई डेटा शेयरिंग नहीं होगी।
क्या हुआ आज?
सुप्रीम कोर्ट (चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमलया बागची और विपुल पांचोली की बेंच) में सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल (WhatsApp की तरफ से) ने कहा कि कंपनी CCI (कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया) के निर्देशों का पूरी तरह पालन करेगी।
NCLAT (नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल) के दिसंबर 2025 के फैसले के अनुसार, 16 मार्च 2026 तक यूजर कंसेंट सिस्टम लागू कर दिया जाएगा।
कंपनी ने इंटरिम एप्लीकेशन वापस ले ली और CCI को कंप्लायंस रिपोर्ट फाइल करने का वादा किया।
कोर्ट ने इसे नोट किया और इंटरिम एप्लीकेशन डिसमिस कर दी। मुख्य केस (2021 पॉलिसी पर CCI का ₹213 करोड़ जुर्माना और डेटा शेयरिंग बैन) आगे सुनवाई के लिए लंबित रहेगा।
बैकग्राउंड और पहले क्या हुआ?
3 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने WhatsApp और Meta को कड़ी फटकार लगाई थी। CJI सूर्यकांत ने कहा था: “हम एक भी डेटा शेयर करने की इजाजत नहीं देंगे। आप भारतीयों की प्राइवेसी से खेल नहीं सकते। अगर संविधान नहीं मान सकते तो भारत छोड़ दें।” पॉलिसी को “डेटा चोरी का शालीन तरीका” और “take it or leave it” बताया था।
CCI ने 2024 में WhatsApp पर ₹213 करोड़ जुर्माना लगाया था और 5 साल के लिए Meta के साथ डेटा शेयरिंग (विज्ञापन के लिए) पर बैन लगाया था, क्योंकि यह दबदबे का दुरुपयोग था।
NCLAT ने नवंबर 2025 में बैन हटा दिया लेकिन जुर्माना बरकरार रखा।
Meta-WhatsApp ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन आज यूजर कंसेंट पर सहमति जताकर दबाव कम किया।
यूजर्स के लिए क्या मतलब?
अब WhatsApp में एक इन-ऐप नोटिफिकेशन/सेटिंग्स टैब आएगा, जहां यूजर्स डेटा शेयरिंग को ऑप्ट-आउट या मैनेज कर सकेंगे।
विज्ञापन/कमर्शियल यूज के लिए डेटा शेयरिंग अनिवार्य नहीं रहेगी।
यह फैसला भारतीय यूजर्स की प्राइवेसी को मजबूत करता है, खासकर जब WhatsApp भारत में सबसे बड़ा मैसेजिंग ऐप है (50 करोड़+ यूजर्स)।
CCI की अपील (5 साल बैन बहाल करने की) अभी सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है।
यह यू-टर्न कोर्ट की सख्ती और यूजर प्राइवेसी के दबाव का नतीजा है। WhatsApp ने कहा है कि वे भारतीय कानूनों का सम्मान करते हैं।
