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लखनऊ यूनिवर्सिटी में मस्जिद गेट बंद करने पर बवाल: छात्रों ने बाहर पढ़ी नमाज, हिंदू छात्र बने ढाल – सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल

लखनऊ यूनिवर्सिटी में मस्जिद गेट बंद करने पर बवाल: छात्रों ने बाहर पढ़ी नमाज, हिंदू छात्र बने ढाल – सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल

लखनऊ यूनिवर्सिटी (LU) परिसर में ऐतिहासिक लाल बारादरी (Lal Baradari) इमारत के अंदर स्थित मस्जिद के मुख्य गेट को प्रशासन ने सील कर दिया, जिसके बाद रविवार (22 फरवरी 2026) को छात्रों में जबरदस्त हंगामा हुआ। प्रशासन ने इमारत के जर्जर होने, ASI संरक्षित होने और रेनोवेशन/सुरक्षा कार्य (फेंसिंग) के लिए गेट बंद किया और बैरिकेडिंग लगा दी। छात्रों का आरोप: बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के मुस्लिम छात्रों की नमाज रोकने की कोशिश की गई, खासकर रमजान के दौरान।

क्या हुआ?

मुस्लिम छात्रों ने गेट बंद होने पर बाहर ही नमाज अदा की (लाल बारादरी के सामने रोडसाइड/ओपन एरिया में)।

विरोध में छात्रों ने बैरिकेडिंग गिराई, निर्माण सामग्री फेंकी और सिट-इन प्रदर्शन किया।

हिंदू छात्रों (समाजवादी छात्र सभा SCS, NSUI, AISA आदि से जुड़े) ने मुस्लिम साथियों के पीछे ह्यूमन चेन (मानव श्रृंखला) बनाकर सुरक्षा घेरा दिया – हाथ में हाथ डालकर ढाल बने।

नमाज के बाद छात्रों ने वहीं इफ्तार भी किया, जिसे “गंगा-जमुनी तहजीब” की मिसाल बताया जा रहा है।

वीडियो वायरल होने पर सोशल मीडिया पर सराहना हुई, कई ने इसे “एकता की जीत” और “नफरत हारे” कहा।

प्रशासन का पक्ष:

लाल बारादरी 200 साल पुरानी ASI-संरक्षित इमारत है (नासिरुद्दीन हैदर द्वारा बनाई गई)।

निर्माण/सुरक्षा कार्य के लिए गेट सील किया गया, धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाने का इरादा नहीं।

विरोध करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई।

अन्य अपडेट:

भारी पुलिस फोर्स तैनात की गई, स्थिति नियंत्रण में है (कोई बड़ी हिंसा नहीं)।

छात्र नेता (जैसे विशाल सिंह NSUI, नवनीत कुमार SCS) ने कहा: “संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ है, धार्मिक अधिकारों का हनन।”

कुछ रिपोर्ट्स में प्रो-नमाज और एंटी-नमाज ग्रुप्स के बीच टकराव का जिक्र, लेकिन मुख्य फोकस सद्भाव पर।

यह घटना उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक सद्भाव और छात्र एकता की सकारात्मक मिसाल बन गई है।

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