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ईरान के बाद अब यमन में भी भड़की सरकार के खिलाफ विरोध की आग: दक्षिण यमन में अलग राज्य की मांग तेज

ईरान के बाद अब यमन में भी भड़की सरकार के खिलाफ विरोध की आग: दक्षिण यमन में अलग राज्य की मांग तेज, 1990 से पहले की व्यवस्था बहाल करने की पुकार

अडेन/सना: यमन में राजनीतिक संकट और गृहयुद्ध के बीच दक्षिणी इलाकों में सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज हो गए हैं। दक्षिण यमन के अलगाववादी समूह सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) के समर्थकों ने बड़े पैमाने पर रैलियां निकालीं, जहां उन्होंने 1990 से पहले की व्यवस्था (यानी दक्षिण यमन को स्वतंत्र राज्य के रूप में बहाल करने) की मांग की। यह विरोध ईरान में जारी प्रदर्शनों के बाद मध्य पूर्व में एक और बड़े उथल-पुथल का संकेत दे रहा है।

मुख्य घटनाक्रम:

जनवरी 2026 में STC ने हदरमौत और अल-महरा जैसे दक्षिण-पूर्वी प्रांतों पर कब्जा करने की कोशिश की, लेकिन सऊदी समर्थित यमन सरकार (प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल – PLC) और सऊदी सेना ने इसे रोक दिया। STC को पीछे हटना पड़ा और कुछ रिपोर्ट्स में उसके विघटन की खबर आई, लेकिन समर्थकों ने इसे खारिज कर दिया।

10 जनवरी 2026 को अडेन में हजारों प्रदर्शनकारियों ने STC के समर्थन में रैली निकाली। वे दक्षिण यमन का पुराना झंडा लहराते हुए “स्वतंत्र दक्षिण यमन” और “1990 से पहले की व्यवस्था बहाल करो” के नारे लगा रहे थे।

प्रदर्शनकारियों ने सऊदी अरब के खिलाफ भी नारे लगाए और STC नेता ऐदरूस अल-जुबैदी का समर्थन किया, जो UAE में शरण लिए हुए हैं। कुछ ने इसे “दक्षिणी लोगों का जनमत संग्रह” बताया।

फरवरी 2026 तक विरोध जारी है। अल-धाली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुए, जहां प्रदर्शनकारियों ने दक्षिण यमन के प्राकृतिक संसाधनों के पारदर्शी प्रबंधन और स्थानीय लाभ की मांग की। उन्होंने UN और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से शांतिपूर्ण विरोध की रक्षा करने की अपील की।

STC के समर्थक दावा करते हैं कि 1990 में उत्तर और दक्षिण यमन के एकीकरण के बाद दक्षिणी लोगों के साथ भेदभाव हुआ है—आर्थिक उपेक्षा, संसाधनों का शोषण और राजनीतिक हाशिए पर धकेलना। वे “स्टेट ऑफ साउथ अरेबिया” की मांग कर रहे हैं।

पृष्ठभूमि:

यमन 1990 में उत्तर (यमन अरब रिपब्लिक) और दक्षिण (पीपुल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ यमन) के एकीकरण से बना था। 1994 में अलगाववादी विद्रोह हुआ था, जिसे दबा दिया गया।

2014 से हूती विद्रोह और सऊदी गठबंधन के हस्तक्षेप से यमन गृहयुद्ध में फंसा है। STC 2017 में बना, UAE समर्थित है और दक्षिणी स्वतंत्रता की मांग करता है।

PLC (रशाद अल-अलीमी के नेतृत्व में) अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार है, लेकिन STC के साथ टकराव जारी है। सऊदी अरब एकजुट यमन चाहता है, जबकि UAE STC का समर्थन करता है।

हूती (सना पर कब्जा) अलग मुद्दे पर हैं, लेकिन दक्षिणी विरोध से यमन का विखंडन और गहरा सकता है।

यह विरोध यमन की अस्थिरता को और बढ़ा रहा है, जहां पहले से ही हूती हमले, आर्थिक संकट और मानवीय संकट चल रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय (UN, सऊदी, UAE) पर दबाव है कि वे दक्षिणी मांगों को संबोधित करें, वरना क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ सकता है।

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