होलाष्टक 2026: होलाष्टक के 8 दिनों में कौन सा ग्रह कब होता है उग्र, क्या करने से ग्रह होंगे शांत? जानें पूरी डिटेल
होलाष्टक 2026: होलाष्टक के 8 दिनों में कौन सा ग्रह कब होता है उग्र, क्या करने से ग्रह होंगे शांत? जानें पूरी डिटेल
हिंदू पंचांग के अनुसार, होली से ठीक 8 दिन पहले होलाष्टक शुरू हो जाता है। यह अवधि फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से शुरू होकर पूर्णिमा (होलिका दहन) तक चलती है। साल 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी 2026 (सुबह से) से शुरू होकर 3 मार्च 2026 तक रहेगा। इस दौरान शुभ-मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण, नया व्यापार शुरू करना या संपत्ति खरीदना वर्जित माना जाता है, क्योंकि ग्रहों का स्वभाव उग्र हो जाता है और नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
होलाष्टक 2026 की तिथियां (संभावित पंचांग अनुसार):
अष्टमी: 24-25 फरवरी (शुरुआत)
नवमी: 25-26 फरवरी
दशमी: 26-27 फरवरी
एकादशी (रंगभरी एकादशी): 27 फरवरी
द्वादशी (नृसिंह द्वादशी): 28 फरवरी
त्रयोदशी: 1 मार्च (प्रदोष व्रत)
चतुर्दशी: 2 मार्च
पूर्णिमा (होलिका दहन): 3 मार्च (समापन, होली 4 मार्च को)
होलाष्टक में कौन सा ग्रह कब उग्र रहता है?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इन 8 दिनों में प्रमुख ग्रह (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु) उग्र/रुद्र अवस्था में रहते हैं। हर दिन एक ग्रह विशेष रूप से प्रभावशाली और क्रोधित माना जाता है:
अष्टमी तिथि: चंद्रमा उग्र (मन अस्थिर, भावनात्मक तनाव बढ़ सकता है)
नवमी तिथि: सूर्य उग्र (स्वास्थ्य, आत्मविश्वास पर असर, पिता से संबंधित मुद्दे)
दशमी तिथि: शनि उग्र (कष्ट, देरी, मेहनत बेकार होने का डर)
एकादशी तिथि: गुरु (बृहस्पति) उग्र (ज्ञान, शिक्षा, गुरु से संबंधित परेशानी)
द्वादशी तिथि: शुक्र उग्र (प्रेम, वैवाहिक जीवन, सुख-सुविधा में बाधा)
त्रयोदशी तिथि: बुध उग्र (व्यापार, बुद्धि, संवाद में गड़बड़ी)
चतुर्दशी तिथि: मंगल उग्र (क्रोध, दुर्घटना, झगड़े का खतरा)
पूर्णिमा तिथि: राहु उग्र (भ्रम, छल, अचानक नुकसान)
ये प्रभाव सामान्य ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं; व्यक्तिगत कुंडली में अलग असर हो सकता है।
ग्रहों को शांत करने के उपाय (ज्योतिषीय सलाह):
होलाष्टक में शुभ कार्य वर्जित हैं, लेकिन पूजा-पाठ, साधना और दान से ग्रहों की उग्रता कम की जा सकती है। मुख्य उपाय:
भगवान नरसिंह की पूजा: होलाष्टक प्रहलाद की कथा से जुड़ा है। रोज नरसिंह कैवल्य मंत्र (“ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलंतं सर्वतोमुखं। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु मृत्युं नमाम्यहम्॥”) का 108 बार जाप करें। नरसिंह के 108 नामों का पाठ बहुत फलदायी।
हनुमान चालीसा या सुंदरकांड: रोज पढ़ें, खासकर मंगलवार और शनिवार को।
दान-पुण्य: गरीबों को कंबल, अनाज, गुड़-चने का दान दें। काले तिल, काले कपड़े या लोहे का दान शनि-राहु के लिए अच्छा।
रोजाना: सूर्य को अर्घ्य दें, चंद्रमा को दूध चढ़ाएं। मंगलवार को हनुमान मंदिर में सिंदूर चढ़ाएं।
संयम: क्रोध, झगड़े, नकारात्मक सोच से दूर रहें। घर में साफ-सफाई रखें, तुलसी पूजा करें।
विशेष: होलिका दहन के दिन होलिका के चारों ओर 7 बार परिक्रमा करें और “होलिका दहन” मंत्र जपें।
यह समय नकारात्मक ऊर्जा से बचने और आध्यात्मिक साधना बढ़ाने का है। यदि कोई विशेष समस्या है तो व्यक्तिगत ज्योतिष परामर्श लें। होली की खुशियां मनाएं, लेकिन होलाष्टक में सतर्क रहें!
