राजनीति

आजमगढ़ में योगी कैबिनेट के दो मंत्रियों की खुली अदावत, मंच पर शक्ति प्रदर्शन: ओम प्रकाश राजभर ने अनिल राजभर को नहीं बुलाया, अलग-अलग रैलियां कर दिखाई ताकत

आजमगढ़ में योगी कैबिनेट के दो मंत्रियों की खुली अदावत, मंच पर शक्ति प्रदर्शन: ओम प्रकाश राजभर ने अनिल राजभर को नहीं बुलाया, अलग-अलग रैलियां कर दिखाई ताकत

आजमगढ़/लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में योगी सरकार के दो कैबिनेट मंत्रियों—ओम प्रकाश राजभर (सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी प्रमुख) और अनिल राजभर (बीजेपी विधायक और मंत्री)—की पुरानी अदावत आजमगढ़ में फिर सुर्खियों में आ गई। महाराजा सुहेलदेव की जयंती (22 फरवरी 2026) के मौके पर दोनों नेताओं ने अलग-अलग रैलियां कीं, जहां एक-दूसरे को नजरअंदाज कर शक्ति प्रदर्शन किया। ओम प्रकाश राजभर ने अपनी ‘सामाजिक समरसता महारैली’ में अनिल राजभर को कोई निमंत्रण नहीं दिया, जबकि अनिल राजभर ने अलग स्थान पर अपना कार्यक्रम आयोजित किया।

घटना का विवरण:

ओम प्रकाश राजभर की महारैली: अतरौलिया विधानसभा क्षेत्र में आयोजित इस रैली को सुभासपा ने ब्राह्मण, राजभर, क्षत्रिय, चौहान, नाई, निषाद समेत कई समाजों को एकजुट करने का मौका बताया। ओम प्रकाश ने इसे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा शक्ति प्रदर्शन करार दिया और सपा को चैलेंज किया कि “आजमगढ़ अब सपा का गढ़ नहीं रहा”। रैली में सामाजिक समरसता पर जोर दिया गया।

अनिल राजभर का कार्यक्रम: अनिल राजभर ने महाराजा सुहेलदेव जयंती पर अलग जगह अपना संबोधन दिया। उन्होंने कहा, “राष्ट्र के नाम पर सब कुछ छोड़कर समर्पित होना चाहिए। राजा सुहेलदेव प्रेरणा देते हैं। जहां देश, परंपराएं और संस्कृति की बात हो, वहां कोई समझौता नहीं।” उन्होंने हिंदू धर्म की रक्षा पर जोर दिया।

निमंत्रण न देने का मुद्दा: ओम प्रकाश राजभर ने अनिल राजभर के कार्यक्रम को लेकर कहा कि “हमारा आयोजन सुहेलदेव जयंती मनाने के लिए है। दो-तीन दिन आगे-पीछे कर लेते।” इससे साफ है कि दोनों के बीच कोई समन्वय नहीं था, बल्कि प्रतिद्वंद्विता दिखाई दी।

पृष्ठभूमि और राजनीतिक महत्व:

दोनों नेता राजभर समाज से हैं, लेकिन ओम प्रकाश राजभर NDA (बीजेपी गठबंधन) में हैं, जबकि अनिल राजभर बीजेपी से सीधे जुड़े हैं। राजभर वोट बैंक पूर्वांचल में निर्णायक है, और दोनों एक-दूसरे को चुनौती देते रहे हैं।

यह घटना 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजभर समाज में नेतृत्व की जंग को उजागर करती है। ओम प्रकाश की रैली को ब्राह्मण वोट साधने और नए सामाजिक समीकरण बनाने की कोशिश माना जा रहा है।

योगी सरकार में दोनों मंत्री हैं, लेकिन मंच पर अलग-अलग दिखना पार्टी लाइन से ऊपर व्यक्तिगत/समुदायिक रणनीति को दर्शाता है।

यह अदावत राजभर समाज में बंटवारे का संकेत है, जिसका फायदा विपक्ष (खासकर सपा) उठा सकता है। दोनों नेताओं के समर्थक सोशल मीडिया पर एक-दूसरे पर तंज कस रहे हैं, और पूर्वांचल की राजनीति में यह नया ट्विस्ट चर्चा का विषय बना हुआ है।

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