अब मात्र 10 मिनट में होगी इंजन की धुलाई! भारतीय रेलवे ने किया सफल ट्रायल, पानी की बचत भी होगी 75-80%
अब मात्र 10 मिनट में होगी इंजन की धुलाई! भारतीय रेलवे ने किया सफल ट्रायल, पानी की बचत भी होगी 75-80%
नई दिल्ली/कोटा: भारतीय रेलवे ने लोकोमोटिव (इंजन) की सफाई में क्रांति लाने वाली नई तकनीक का सफल परीक्षण किया है। अब एक इंजन की पूरी धुलाई मात्र 10 मिनट में हो जाएगी, जो पहले घंटों में लगता था। यह सफल ट्रायल पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल के टीकेडी विद्युत लोको शेड (TKD Electric Loco Shed) में किया गया, जहां देश का पहला ऑटोमैटिक लोको वॉशिंग प्लांट स्थापित किया गया है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह अत्याधुनिक स्वचालित संयंत्र (Automatic Loco Washing Plant) इंजन को तेजी से साफ करने में सक्षम है। मुख्य विशेषताएं:
समय: एक इंजन की धुलाई में अधिकतम 10 मिनट।
क्षमता: प्रतिदिन न्यूनतम 25 इंजनों की सफाई संभव।
पानी की बचत: प्रति इंजन अधिकतम 350 लीटर ताजा पानी का उपयोग, और 75-80% पानी का रीसाइक्लिंग (पुनर्चक्रण) कर दोबारा इस्तेमाल।
पर्यावरण लाभ: पानी की बर्बादी कम होगी, जिससे रेलवे की पर्यावरण-अनुकूल पहल को मजबूती मिलेगी।
इस प्लांट में हाई-प्रेशर जेट, ब्रश सिस्टम और ऑटोमैटिक कंट्रोल का इस्तेमाल होता है, जो इंजन के बाहरी हिस्से को पूरी तरह साफ करता है। ट्रायल के दौरान यह पूरी तरह सफल रहा और अब इसे नियमित रूप से इस्तेमाल किया जाएगा। कुछ रिपोर्ट्स में तुगलकाबाद (दिल्ली) इलेक्ट्रिक लोको शेड में भी इसी तरह के प्लांट का जिक्र है, लेकिन कोटा में यह पहला पूर्ण सफल ट्रायल माना जा रहा है।
रेलवे के एक अधिकारी ने बताया, “यह तकनीक न केवल समय बचाएगी बल्कि रखरखाव की लागत कम करेगी और इंजनों की उपलब्धता बढ़ाएगी। इससे ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार होगा।” यह कदम भारतीय रेलवे की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल से जुड़ा है, जहां स्वदेशी तकनीक पर जोर दिया जा रहा है।
फिलहाल यह प्लांट कोटा मंडल में है, लेकिन सफलता के बाद अन्य लोको शेड्स में भी इसे लगाया जाएगा। रेल यात्रियों के लिए यह अच्छी खबर है, क्योंकि साफ-सुथरे इंजन से सुरक्षा और दक्षता बढ़ेगी!
