‘शिकायतकर्ता खुद हिस्ट्रीशीटर…’, यौन शोषण केस में FIR पर अविमुक्तेश्वरानंद का पलटवार
‘शिकायतकर्ता खुद हिस्ट्रीशीटर…’, यौन शोषण केस में FIR पर अविमुक्तेश्वरानंद का पलटवार
प्रयागराज/वाराणसी: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर नाबालिगों (बटुकों) के यौन शोषण के गंभीर आरोपों में प्रयागराज की पॉक्सो स्पेशल कोर्ट के आदेश पर झूंसी थाने में FIR दर्ज हो गई है। कोर्ट के जज विनोद कुमार चौरसिया ने शनिवार को शाकंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की याचिका पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ POCSO एक्ट और बीएनएस की संबंधित धाराओं (69, 74, 75, 76, 79, 109 आदि) के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश दिया था।
FIR दर्ज होने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मीडिया से बातचीत में मामले को पूरी तरह फर्जी और साजिशपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, “शिकायतकर्ता खुद हिस्ट्रीशीटर है। आशुतोष (पांडे/ब्रह्मचारी) का नाम शामली जिले के कंधला पुलिस स्टेशन में हिस्ट्रीशीटर के रूप में दर्ज है। उसके खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले हैं। यह सनातन धर्म और शंकराचार्य पद को बदनाम करने की साजिश है।”
स्वामी ने आगे कहा, “मैं योगी आदित्यनाथ नहीं हूं जो केस हटवा लूं। हम न्याय व्यवस्था पर भरोसा करते हैं। जांच होगी तो सच सामने आएगा। यह केस फेब्रिकेटेड (गढ़ा हुआ) है और गौ माता के लिए मेरी आवाज दबाने की कोशिश है।” उन्होंने दावा किया कि आरोप लगाने वाले रामभद्राचार्य के शिष्य हैं और कई लोग उनके द्वारा झूठे केस दर्ज कराने के शिकार हैं।
मामले की पृष्ठभूमि:
शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने दावा किया कि माघ मेला के दौरान विद्या मठ आश्रम में नाबालिग बटुकों के साथ यौन दुर्व्यवहार हुआ।
दो नाबालिगों के बयान कोर्ट में वीडियोग्राफी के जरिए दर्ज किए गए थे।
पुलिस ने पहले शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की, जिसके बाद कोर्ट में अर्जी दाखिल की गई।
FIR में 2-3 अज्ञात व्यक्तियों का भी नाम शामिल है।
यह मामला सनातन संत समाज में तीखी बहस का विषय बन गया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थक इसे धार्मिक संस्थाओं के खिलाफ साजिश बता रहे हैं, जबकि शिकायतकर्ता पक्ष जांच की मांग पर अड़ा है। पुलिस अब जांच शुरू कर चुकी है और मामले की निगरानी कर रही है।
