JNU में दोहरी विवाद: हॉस्टल खाना बेचने पर जुर्माना, कुलपति के ‘दलित विक्टिम कार्ड’ बयान पर हंगामा
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार विवाद दो बड़े मुद्दों से जुड़ा है—एक ओर हॉस्टल मेस के खाने को लेकर छात्रों पर लगे जुर्माने का मामला, और दूसरी ओर कुलपति शांतिश्री धुलिपुडी पंडित के दलितों पर दिए गए कथित विवादास्पद बयान से उपजा बवाल। ये दोनों घटनाएं पिछले कुछ दिनों में चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं, जिससे कैंपस में तनाव बढ़ गया है।
हॉस्टल मेस का खाना बेचने का आरोप और जुर्माना
JNU के कोयना हॉस्टल प्रशासन ने हाल ही में सात छात्रों पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया है। आरोप है कि ये छात्र अपना आवंटित मेस भोजन दूसरों को ट्रांसफर कर रहे थे या बेच रहे थे, जो हॉस्टल मैनुअल का उल्लंघन है। प्रशासन का कहना है कि यह भोजन का दुरुपयोग है।
छात्र संगठनों ने इस फैसले का विरोध किया है। उनका तर्क है कि छात्रों ने पहले ही मेस फीस जमा कर दी है, इसलिए दोस्तों के साथ खाना शेयर करना कोई गलत बात नहीं। एक छात्र समूह ने इसे “अन्यायपूर्ण” करार देते हुए विरोध प्रदर्शन किया। यह मामला सोशल मीडिया और मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है, जहां कुछ लोग इसे “छात्र बेच रहे थे हॉस्टल का खाना” के रूप में पेश कर रहे हैं।
कुलपति के ‘दलित विक्टिम कार्ड’ वाले बयान पर बवाल
दूसरा और बड़ा विवाद JNU की वाइस चांसलर शांतिश्री धुलिपुडी पंडित के एक पॉडकास्ट इंटरव्यू से जुड़ा है (16 फरवरी को प्रकाशित)। उन्होंने UGC की नई गाइडलाइंस पर चर्चा करते हुए कहा था कि “आप हमेशा पीड़ित बनकर या विक्टिम कार्ड खेलकर प्रगति नहीं कर सकते। यह अश्वेतों (Blacks) के लिए किया गया था, वही चीज यहां दलितों के लिए लाई गई थी।”
इस बयान को कई छात्र संगठनों, खासकर JNUSU ने “जातिवादी” और “असंवेदनशील” बताया। उन्होंने कुलपति के इस्तीफे की मांग की और शनिवार को देशव्यापी विरोध की घोषणा की। छात्रों का आरोप है कि यह बयान दलितों और marginalized समुदायों के ऐतिहासिक अन्याय को नकारता है।
कुलपति ने सफाई देते हुए कहा कि उनका मतलब ऐसा नहीं था और वे खुद बहुजन समाज से हैं। उन्होंने कहा, “मैंने ऐसा कोई जातिवादी इरादा नहीं रखा।” लेकिन विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा।
JNU क्यों बार-बार चर्चा में?
JNU लंबे समय से विवादों का केंद्र रहा है—चाहे फीस वृद्धि हो, हॉस्टल नियम हों, या राजनीतिक बयान। हाल के महीनों में हॉस्टल eviction, फूड सेग्रीगेशन (वेज-नॉनवेज), और अब ये दो मुद्दे सामने आए हैं। संयुक्त किसान मोर्चा जैसे संगठनों ने भी JNU प्रशासन की आलोचना की है।
कैंपस में तनाव जारी है, और छात्र संगठन प्रदर्शन की तैयारी में जुटे हैं। क्या यह सिर्फ एक और विवाद है या बड़े बदलाव की शुरुआत? समय बताएगा। JNU की ये खबरें दिखाती हैं कि यहां विचारों की लड़ाई कभी थमती नहीं।
