बांग्लादेश चुनाव: BNP पर India से ‘सांठगांठ’ का आरोप, NCP नेता नाहिद इस्लाम ने लगाया बड़ा इल्ज़ाम
बांग्लादेश चुनाव: BNP पर India से ‘सांठगांठ’ का आरोप, NCP नेता नाहिद इस्लाम ने लगाया बड़ा इल्ज़ाम
ढाका/नई दिल्ली: बांग्लादेश के 13वें राष्ट्रीय चुनाव में बीएनपी (Bangladesh Nationalist Party) की भारी जीत और तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद राजनीतिक विवाद फिर गरम हो गया है। नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के संयोजक और छात्र नेता नाहिद इस्लाम ने बीएनपी पर गंभीर आरोप लगाया है कि पार्टी ने चुनाव जीतने के लिए भारत और अवामी लीग (शेख हसीना की पार्टी) के साथ कथित सांठगांठ की। उन्होंने चुनाव परिणामों को ‘संदिग्ध’ बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
नाहिद इस्लाम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “बीएनपी ने भारत और अवामी लीग के साथ मिलकर चुनाव में जीत हासिल की। अवामी लीग के कार्यालयों को फिर से खोलने की इजाजत भी बीएनपी की ‘ग्रीन सिग्नल’ से मिली, जो बिना सांठगांठ के संभव नहीं था।” उन्होंने दावा किया कि ये सब चुनावी हेराफेरी का हिस्सा था, हालांकि उन्होंने कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया। NCP, जो 2024 के छात्र आंदोलन से निकली पार्टी है, ने चुनाव में सिर्फ 6 सीटें जीतीं, जबकि बीएनपी ने 200+ सीटों के साथ दो-तिहाई बहुमत हासिल किया।
बीएनपी का क्या जवाब?
बीएनपी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। पार्टी के प्रवक्ताओं ने इसे “बेबुनियाद” और “राजनीतिक बदले की भावना” से प्रेरित बताया। तारिक रहमान सरकार ने हाल ही में भारत के साथ वीजा सेवाएं बहाल करके संबंध सुधारने के संकेत दिए हैं, और पीएम मोदी ने भी तारिक रहमान को बधाई दी थी। दोनों देशों के बीच फोन पर बातचीत हुई, जहां मोदी ने “म्यूचुअल रिस्पेक्ट” पर आधारित संबंधों की बात की।
क्यों उठ रहे हैं आरोप?
चुनाव के बाद अवामी लीग (जिसकी गतिविधियां अभी भी प्रतिबंधित हैं) के कुछ कार्यालय फिर से खुल गए, जिसे NCP ने बीएनपी की मिलीभगत बताया।
नाहिद इस्लाम, जो 2024 के आंदोलन के प्रमुख चेहरे थे, अब संसद में विपक्षी चीफ व्हिप हैं। वे बीएनपी की जीत को “मैनिपुलेटेड” मानते हैं।
ये आरोप ऐसे समय आए हैं जब भारत-बांग्लादेश संबंधों में सुधार की कोशिशें चल रही हैं, लेकिन शेख हसीना की भारत में मौजूदगी और एक्सट्राडिशन की मांग अभी भी तनाव का कारण है।
क्या होगा आगे?
विश्लेषकों का कहना है कि ये आरोप राजनीतिक स्थिरता को चुनौती दे सकते हैं, लेकिन बीएनपी की मजबूत बहुमत वाली सरकार पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। भारत ने बीएनपी सरकार के साथ काम करने की इच्छा जताई है, और दोनों तरफ से “म्यूचुअल बेनिफिट” पर फोकस है। हालांकि, अगर ऐसे आरोप बढ़े तो घरेलू राजनीति में बवाल मच सकता है।
क्या ये सिर्फ राजनीतिक आरोप हैं या कुछ बड़ा खुलासा होगा? बांग्लादेश की राजनीति में अभी भी उथल-पुथल जारी है। आप क्या सोचते हैं—ये आरोप सही हैं या विरोधियों की रणनीति? कमेंट में बताएं! 🇧🇩🇮🇳
