15 साल तक के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन: मैक्रों की सलाह मानेगा भारत?
15 साल तक के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन: मैक्रों की सलाह मानेगा भारत?
नई दिल्ली: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत में बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया है। इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में बोलते हुए मैक्रों ने सुझाव दिया कि भारत को 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लगा देना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे अपील की, “मिस्टर पीएम, क्या आप इस क्लब में शामिल होंगे?”
मैक्रों ने कहा कि फ्रांस जल्द ही 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल नेटवर्क्स पर बैन लगाने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है। कई यूरोपीय देश जैसे स्पेन और ग्रीस भी इसी दिशा में कदम उठा रहे हैं। उन्होंने इसे “बच्चों और किशोरों की सुरक्षा के लिए नई कोशिशों का गठबंधन” बताया और जोर दिया कि ऑनलाइन बच्चों को वो चीजें नहीं दिखनी चाहिए जो असल जिंदगी में कानूनी रूप से प्रतिबंधित हैं। मैक्रों ने इसे सिर्फ नियम का मामला नहीं, बल्कि सभ्यता की सुरक्षा बताया।
यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया भर में बच्चों पर सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभावों (जैसे एडिक्शन, साइबरबुलिंग, मानसिक स्वास्थ्य पर असर) को लेकर चिंता बढ़ रही है। ऑस्ट्रेलिया पहले ही 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक आदि) पर बैन लगा चुका है। फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देश भी सख्त नियम बना रहे हैं।
भारत में क्या होगा आगे?
भारत सरकार पहले से ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ उम्र-आधारित प्रतिबंधों पर चर्चा कर रही है। डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP) में 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए पैरेंटल कंसेंट की जरूरत है। आर्थिक सर्वे 2026-27 में भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल ऐड्स पर उम्र सीमा लगाने की सिफारिश की गई है। आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी कहा है कि सरकार इस मुद्दे पर कंपनियों से बात कर रही है।
हालांकि, भारत में पूर्ण बैन लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट पहुंच सीमित है, लेकिन जहां है, वहां बच्चे एजुकेशन, एंटरटेनमेंट और सोशल कनेक्टिविटी के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल करते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बैन से पहले मजबूत एज वेरिफिकेशन, बेहतर पैरेंटल कंट्रोल और जागरूकता जरूरी है।
फिलहाल, मैक्रों की सलाह से बहस छिड़ गई है। क्या भारत फ्रांस और यूरोप के नक्शेकदम पर चलेगा, या अपना अलग रास्ता अपनाएगा? यह सवाल आने वाले महीनों में गर्म रहेगा। बच्चों की सुरक्षा और डिजिटल आजादी के बीच संतुलन बनाना अब बड़ी चुनौती है।
