बिहार कांग्रेस में बड़ी कार्रवाई: पूर्व विधायक छत्रपति यादव समेत दो नेताओं को 6 साल के लिए पार्टी से निकाला!
बिहार कांग्रेस में बड़ी कार्रवाई: पूर्व विधायक छत्रपति यादव समेत दो नेताओं को 6 साल के लिए पार्टी से निकाला! अनुशासन समिति का सख्त फैसला, पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप
बिहार कांग्रेस में अंदरूनी कलह चरम पर पहुंच गई है। प्रदेश अनुशासन समिति ने पार्टी विरोधी गतिविधियों और संगठनात्मक अनुशासन तोड़ने के आरोप में दो वरिष्ठ नेताओं को 6 साल के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है। निकाले गए नेताओं में पूर्व विधायक छत्रपति यादव और रिसर्च विभाग के पूर्व चेयरमैन व पूर्व प्रवक्ता आनंद माधव शामिल हैं। यह कार्रवाई 18 फरवरी 2026 को अनुशासन समिति के अध्यक्ष कपिलदेव प्रसाद यादव द्वारा जारी आदेश से हुई।
क्या हैं आरोप?
दोनों नेताओं पर पार्टी लाइन से अलग बयानबाजी करने, संगठनात्मक मर्यादा तोड़ने और पार्टी विरोधी गतिविधियों में लगातार संलिप्त रहने का आरोप है।
अनुशासन समिति ने कहा कि उनकी गतिविधियां पार्टी के मूल सिद्धांतों, अनुशासन और संगठन की छवि को नुकसान पहुंचा रही थीं।
आदेश में स्पष्ट किया गया कि दोनों की पार्टी विरोधी गतिविधियां बढ़ती जा रही थीं, जिसके कारण यह सख्त कदम उठाना पड़ा।
कौन हैं निकाले गए नेता?
छत्रपति यादव: पूर्व विधायक (कांग्रेस के पुराने चेहरे), कई बार पार्टी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आनंद माधव: AICC सदस्य (कुछ रिपोर्ट्स में), रिसर्च विभाग के पूर्व चेयरमैन और पूर्व प्रवक्ता। दोनों लंबे समय से पार्टी से जुड़े थे।
कांग्रेस में क्यों बढ़ी कलह?
यह कार्रवाई बिहार विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की हार के बाद जारी अंदरूनी विवाद का नतीजा मानी जा रही है। पार्टी में नेतृत्व और रणनीति पर असहमति बढ़ी है, जिसके चलते अनुशासन समिति सक्रिय हुई। इससे पहले भी कांग्रेस ने कई नेताओं को शो-कॉज नोटिस जारी किए थे, लेकिन अब निष्कासन जैसी सख्त कार्रवाई हुई है।
प्रतिक्रियाएं
कांग्रेस नेतृत्व ने इसे अनुशासन बनाए रखने का कदम बताया है।
निकाले गए नेताओं की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पार्टी के अंदर सियासी हलचल तेज हो गई है।
यह फैसला बिहार कांग्रेस की एकता पर सवाल उठा रहा है, खासकर जब विधानसभा में बजट सत्र चल रहा है और विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है।
बिहार कांग्रेस में यह कार्रवाई पार्टी की छवि और एकजुटता पर असर डाल सकती है। क्या इससे और बगावत बढ़ेगी या अनुशासन मजबूत होगा?
