ट्रंप की ‘अनुचित’ दबाव से नाराज जेलेंस्की: रूस-यूक्रेन शांति वार्ता सिर्फ 2 घंटे में खत्म, रूस पर लगाया स्टॉलिंग का आरोप
ट्रंप की ‘अनुचित’ दबाव से नाराज जेलेंस्की: रूस-यूक्रेन शांति वार्ता सिर्फ 2 घंटे में खत्म, रूस पर लगाया स्टॉलिंग का आरोप
जिनेवा में अमेरिका की मध्यस्थता में चल रही रूस-यूक्रेन शांति वार्ता बुधवार (18 फरवरी 2026) को अचानक खत्म हो गई। दूसरे दिन की बैठक महज 2 घंटे ही चल सकी, जिसके बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस पर वार्ता को ‘खींचने’ (stalling) का आरोप लगाया। जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों को ‘अनुचित’ बताते हुए कहा कि ट्रंप की ओर से यूक्रेन पर दबाव बनाना गलत है। ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि यूक्रेन को ‘जल्दी टेबल पर आना चाहिए’, जिससे जेलेंस्की नाराज दिखे।
वार्ता का क्या हुआ?
ट्रंप प्रशासन की पहल पर जिनेवा में मंगलवार से शुरू हुई त्रिपक्षीय वार्ता (अमेरिका, रूस और यूक्रेन) का पहला दिन 6 घंटे चला, जिसे रूस ने ‘कठिन लेकिन व्यावसायिक’ बताया।
लेकिन दूसरे दिन बैठक सिर्फ 2 घंटे में खत्म हो गई। यूक्रेन ने इसे ‘सकारात्मक’ बताया, लेकिन जेलेंस्की ने X (पूर्व ट्विटर) पर कहा: “रूस वार्ता को खींचने की कोशिश कर रहा है, जबकि ये अंतिम चरण में पहुंच सकती थीं।”
अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ने कहा कि ‘महत्वपूर्ण प्रगति’ हुई है, लेकिन मुख्य मुद्दों (जैसे क्षेत्रीय मांगें और सुरक्षा गारंटी) पर सहमति नहीं बनी।
रूस ने वार्ता को ‘कठिन’ माना, जबकि यूक्रेन ने प्रगति की बात की। ट्रंप ने यूक्रेन को ‘अड़चन’ बताते हुए दबाव बनाया था, जिस पर जेलेंस्की ने कहा: “यह ट्रंप की रणनीति हो सकती है, लेकिन फैसला नहीं।”
ट्रंप-जेलेंस्की में तनाव क्यों?
ट्रंप ने चुनाव जीतने के बाद यूक्रेन युद्ध खत्म करने को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि अगर वार्ता असफल रही तो यूक्रेन जिम्मेदार होगा। जेलेंस्की ने Axios को दिए इंटरव्यू में ट्रंप की टिप्पणियों को ‘अनुचित’ बताया और कहा कि यूक्रेन पहले से ही वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन रूस की मांगें (पूर्वी क्षेत्रों पर कब्जा) अस्वीकार्य हैं। जेलेंस्की ने यूरोप और अमेरिका से सुरक्षा गारंटी की मांग की है।
युद्ध की पृष्ठभूमि
रूस-यूक्रेन युद्ध 4 साल पूरे करने वाला है। ट्रंप ने जून तक युद्ध खत्म करने की डेडलाइन दी है। रूस की मांग है कि यूक्रेन पूर्वी क्षेत्र छोड़े और नाटो सदस्यता त्यागे, जबकि यूक्रेन इसे आक्रमण मानता है। अमेरिका ने दोनों पक्षों को साथ लाने की कोशिश की, लेकिन वार्ता बेनतीजा रही।
आगे क्या?
जेलेंस्की ने कहा कि प्रगति हुई है, लेकिन पोजीशंस अलग हैं। ट्रंप प्रशासन ने कहा कि वार्ता जारी रहेगी। रूस ने कोई नई तारीख नहीं बताई। दुनिया की नजरें अब ट्रंप की अगली चाल पर हैं – क्या दबाव बढ़ेगा या नई पहल होगी?
