राजनीति

तेलंगाना निकाय चुनाव: कांग्रेस की धमाकेदार जीत पर BJP का तंज- ‘वोट चोरी अब कहां गई?’

तेलंगाना निकाय चुनाव: कांग्रेस की धमाकेदार जीत पर BJP का तंज- ‘वोट चोरी अब कहां गई?’

तेलंगाना में हाल ही संपन्न हुए नगर निकाय चुनावों में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बड़ी जीत हासिल की है। राज्य में 10 नगर निगमों और 50 से ज्यादा नगर पालिकाओं में कांग्रेस ने बहुमत हासिल किया, जबकि सत्तारूढ़ भारत राष्ट्र समिति (BRS) और भाजपा को करारी हार मिली। इस जीत के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) को लेकर पुराने आरोपों को याद दिलाया और सवाल उठाया कि “वोट चोरी अब कहां गई?”

चुनाव परिणाम का सारांश

कांग्रेस ने कुल 120 सीटों में से 85 पर कब्जा जमाया, जो 2021 के निकाय चुनावों से दोगुना है।

BRS, जो पहले सत्ता में थी, सिर्फ 25 सीटों पर सिमट गई।

भाजपा को महज 10 सीटें मिलीं, जबकि पिछले चुनाव में उसने 20 से ज्यादा जीती थीं।

हैदराबाद ग्रेटर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (GHMC) में कांग्रेस ने 50% से ज्यादा सीटें जीतीं, जहां MIM का प्रभाव कम हुआ।

मतदान प्रतिशत 65% रहा, और चुनाव शांतिपूर्ण संपन्न हुए। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने परिणामों को पारदर्शी बताया।

BJP का हमला और कांग्रेस का जवाब

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “जब BJP जीतती है तो कांग्रेस और अन्य पार्टियां EVM पर सवाल उठाती हैं, वोट चोरी का रोना रोती हैं। अब तेलंगाना में कांग्रेस की जीत हुई है, तो वोट चोरी कहां गई? EVM वही हैं, चुनाव आयोग वही है। यह दोगली राजनीति बंद होनी चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस की जीत “जनता की गुस्से की वजह से” है, लेकिन BJP 2029 विधानसभा चुनावों में वापसी करेगी।

जवाब में तेलंगाना कांग्रेस प्रमुख और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने पलटवार किया: “BJP को अपनी हार का ठीकरा EVM पर फोड़ने की बजाय आत्मचिंतन करना चाहिए। हमारी जीत जनता की है, जो विकास और रोजगार चाहती है। EVM पर हमारा स्टैंड स्पष्ट है – हम बैलट पेपर की वकालत करते हैं, लेकिन जीत-हार से ऊपर उठकर लोकतंत्र को मजबूत करें।”

पृष्ठभूमि और राजनीतिक मायने

यह चुनाव तेलंगाना में 2023 विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस की पहली बड़ी परीक्षा था, जहां रेवंत रेड्डी सरकार ने लोकल बॉडी चुनावों में फोकस किया। BJP ने EVM पर सवाल उठाने का मुद्दा इसलिए छेड़ा क्योंकि हाल के कुछ चुनावों (जैसे मध्य प्रदेश और राजस्थान) में विपक्ष ने EVM हैकिंग के आरोप लगाए थे। चुनाव आयोग ने सभी आरोपों को खारिज किया है और EVM की विश्वसनीयता पर जोर दिया।

यह जीत कांग्रेस के लिए 2029 लोकसभा चुनावों से पहले बूस्टर है, जबकि BJP और BRS को अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना पड़ेगा। क्या EVM बहस फिर गरमाएगी? राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है। अपडेट्स के लिए बने रहें!

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