राजनीति

रकीबुल हुसैन कौन हैं? असम कांग्रेस के सबसे ताकतवर मुस्लिम नेता, जिन्हें निशाना बनाकर भूपेन बोरा ने दिया इस्तीफा

रकीबुल हुसैन कौन हैं? असम कांग्रेस के सबसे ताकतवर मुस्लिम नेता, जिन्हें निशाना बनाकर भूपेन बोरा ने दिया इस्तीफा

असम की राजनीति में बड़ा भूचाल! पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा ने कांग्रेस से इस्तीफा देते हुए धुबरी से सांसद रकीबुल हुसैन को मुख्य वजह बताया है। बोरा ने आरोप लगाया कि पार्टी अब गौरव गोगोई के नियंत्रण में नहीं है, बल्कि रकीबुल हुसैन ही असम कांग्रेस की “असली कमान” और “एकमात्र आधार” हैं। बोरा जल्द ही BJP में शामिल होने वाले हैं, और यह घटना असम विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले कांग्रेस को बड़ा झटका दे रही है।

रकीबुल हुसैन का राजनीतिक सफर

जन्म और शुरुआत: 7 अगस्त 1964 को नागांव (असम) में जन्मे रकीबुल हुसैन कांग्रेस के वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता हैं। वे असम में कांग्रेस के सबसे शक्तिशाली मुस्लिम चेहरे माने जाते हैं, खासकर अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में उनकी मजबूत पकड़ है।

विधायक से सांसद तक: 2001 से 2024 तक लगातार 5 बार सामागुरी विधानसभा सीट से विधायक रहे (23 साल तक)। 2021-2024 तक असम विधानसभा में विपक्ष के उपनेता भी थे।

मंत्री पद: पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की सरकारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई – 2002-2006 तक राज्य मंत्री, फिर 2006-2016 तक कैबिनेट मंत्री रहे (वन, पर्यटन आदि विभाग)।

2024 लोकसभा जीत: धुबरी लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर भारी जीत हासिल की। AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल को 10 लाख से ज्यादा वोटों (1,012,476 वोटों का अंतर) से हराया – यह भारतीय चुनाव इतिहास में सबसे बड़े मार्जिन में से एक है। इस जीत ने अमित शाह और शिवराज सिंह चौहान जैसे BJP नेताओं के रिकॉर्ड को तोड़ा।

भूपेन बोरा के इस्तीफे में रकीबुल का रोल

भूपेन बोरा ने NDTV और अन्य मीडिया से बातचीत में कहा कि पार्टी में उनके खिलाफ अभियान चला, और रकीबुल हुसैन इसका केंद्र थे। बोरा का दावा है:

असम कांग्रेस अब “रकीबुल कांग्रेस” बन गई है।

गौरव गोगोई सिर्फ “चेहरा” हैं, असली कंट्रोल रकीबुल के हाथ में है।

पार्टी हाईकमान को लिखे पत्र में बोरा ने 32 साल की मेहनत का जिक्र किया और कहा कि अपमान और साइडलाइन होने से तंग आकर इस्तीफा दिया।

विवाद और आरोप

BJP अक्सर रकीबुल पर पूर्व मंत्री रहते घुसपैठियों को संरक्षण देने का आरोप लगाती रही है, खासकर ऊपरी असम में उनकी छवि पर सवाल उठते हैं। लेकिन कांग्रेस में उनकी लोकप्रियता और 2024 की धमाकेदार जीत ने उन्हें पार्टी का “डार्क हॉर्स” और मजबूत स्तंभ बना दिया है।

यह घटना असम कांग्रेस में गहरी कलह को उजागर कर रही है, जहां विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी टूटने के कगार पर है। क्या रकीबुल हुसैन असम कांग्रेस को नई दिशा देंगे या और विभाजन होगा? राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *