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अचानक धंसने लगी धरती और बन गया विशाल गड्ढा: इंडोनेशिया में कुदरत का खौफनाक मंजर, दहशत में लोग – 3 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र निगल गया!

अचानक धंसने लगी धरती और बन गया विशाल गड्ढा: इंडोनेशिया में कुदरत का खौफनाक मंजर, दहशत में लोग – 3 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र निगल गया!

इंडोनेशिया के सेंट्रल अचे प्रांत (Central Aceh Regency) में पोंडोक बालिक गांव (Pondok Balik Village, Ketol District) में पिछले कुछ दिनों से धरती अचानक धंस रही है, जिससे एक विशाल गड्ढा (sinkhole/ground collapse) बन गया है। यह क्रेटर अब 3 हेक्टेयर (करीब 30,000 वर्ग मीटर या 7.4 एकड़, यानी लगभग 30 फुटबॉल मैदान जितना) से ज्यादा चौड़ा हो चुका है और हर दिन 1 मीटर की औसत दर से फैल रहा है। स्थानीय लोग दहशत में हैं – फसलें, सड़कें, घर और बिजली के खंभे सब निगले जा रहे हैं।

क्या हुआ और कितना बड़ा मंजर?

गड्ढा लगभग 100 मीटर गहरा है और लगातार बढ़ रहा है – ड्रोन फुटेज में दिख रहा है कि खेतों के बीच से एक विशाल क्रेटर कट रहा है, जिसमें कॉफी, चिली और गन्ने की फसलें पूरी तरह समा गईं।

मुख्य सड़क (Bener Meriah से Central Aceh जाने वाली) का हिस्सा धंस गया, हाई-वोल्टेज बिजली टावर हटाने पड़े।

गड्ढे का किनारा अब घरों से सिर्फ 300-400 मीटर दूर है – लोग डर रहे हैं कि अगली बारिश में और ज्यादा धंसाव हो सकता है।

यह घटना 2011 से चल रही है (बार-बार लैंडस्लाइड), लेकिन 2022 में 2.8 हेक्टेयर था, अब 3 हेक्टेयर पार कर गया। हाल की बाढ़ और मिट्टी की संतृप्ति ने इसे तेज कर दिया।

वैज्ञानिक कारण: वॉल्केनिक रॉक और मिट्टी में पानी घुसना (water infiltration) – 90% सिन्कहोल इसी से होते हैं। क्षेत्र में भारी बारिश और भूगर्भीय अस्थिरता ने इसे ट्रिगर किया।

लोगों की दहशत और प्रभाव

किसान रो रहे हैं – उनकी पूरी कमाई वाली फसलें खत्म, कई परिवार बेघर होने के कगार पर।

स्थानीय लोग कह रहे हैं: “धरती रातों-रात धंस रही है, कोई चेतावनी नहीं मिली।”

अधिकारियों ने इलाके में सुरक्षा उपाय किए – मॉनिटरिंग बढ़ाई, लेकिन कोई मौत या चोट की रिपोर्ट नहीं (अभी तक सिर्फ संपत्ति का नुकसान)।

सरकार और ESDM Aceh (Energy and Mineral Resources Office) जांच कर रही है – मुआवजे और राहत की बात हो रही है, लेकिन किसान कह रहे हैं कि जमीन अब वापस नहीं आएगी।

पृष्ठभूमि

इंडोनेशिया में ऐसे सिन्कहोल आम हैं क्योंकि यह रिंग ऑफ फायर पर है – ज्वालामुखी, भूकंप और मिट्टी की कमजोरी। हाल ही में Semeru ज्वालामुखी में भी पायरोक्लास्टिक फ्लो हुआ था, लेकिन यह अलग घटना है।

बैरेली में रहते हैं तो UP में भी ऐसे भूगर्भीय जोखिम (जैसे गंगा के किनारे धंसाव) पर ध्यान दें – प्रकृति कभी-कभी अचानक हमला कर देती है! क्या आपने इस वीडियो या फोटो देखे हैं? डरावना मंजर है।

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