शिवाजी महाराज से टीपू सुल्तान की तुलना पर महाराष्ट्र में बवाल! कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल की जीभ काटने पर BJP कार्यकर्ताओं ने 10 लाख का इनाम ऐलान किया
शिवाजी महाराज से टीपू सुल्तान की तुलना पर महाराष्ट्र में बवाल! कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल की जीभ काटने पर BJP कार्यकर्ताओं ने 10 लाख का इनाम ऐलान किया
महाराष्ट्र की राजनीति में नया तूफान! महाराष्ट्र कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल (Harshvardhan Sapkal) ने टीपू सुल्तान को छत्रपति शिवाजी महाराज के “समकक्ष” (equal) बताकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। उनका बयान मालेगांव नगर निगम में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगने के विवाद पर आया था, जिसके बाद भाजपा ने आक्रोश जताया। अब अहिल्यानगर (अहमदनगर) में भाजपा कार्यकर्ताओं ने सपकाल की जीभ काटने पर 10 लाख रुपये का इनाम ऐलान कर दिया है।
क्या कहा सपकाल ने?
बुलढाणा में पत्रकारों से बातचीत में सपकाल ने कहा:
“छत्रपति शिवाजी महाराज का जैसा शौर्य था और उन्होंने स्वराज्य का विचार दिया, ठीक उसी तरह टीपू सुल्तान ने भी अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। वे एक योद्धा और भारत के भूमिपुत्र बने। इसलिए शौर्य के प्रतीक के रूप में टीपू सुल्तान को शिवाजी महाराज के समकक्ष देखना चाहिए।”
उन्होंने बाद में X पर पोस्ट कर सफाई दी कि शिवाजी महाराज की वीरता अतुलनीय है, लेकिन टीपू भी बहादुर और स्वराज प्रेमी थे।
BJP का पलटवार और 10 लाख इनाम:
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे “निंदनीय” और “शर्मनाक” बताया। कहा, “शिवाजी महाराज ने स्वराज्य स्थापित किया और रयत को मुक्त किया, जबकि टीपू सुल्तान ने हजारों हिंदुओं की हत्या की। ऐसी तुलना महाराष्ट्र के लोगों का अपमान है। सपकाल को माफी मांगनी चाहिए।”
अहिल्यानगर में भाजपा कार्यकर्ताओं ने सपकाल की फोटो जलाई और चौराहे पर पोस्टर लगाकर घोषणा की: “जो भी सपकाल की जीभ काटकर लाएगा, उसे 10 लाख रुपये का इनाम मिलेगा।”
पुणे में भाजपा शहर अध्यक्ष धीरज घाटे की शिकायत पर पुलिस ने सपकाल के खिलाफ केस दर्ज किया है। आरोप है कि बयान से हिंदुओं और शिवाजी भक्तों की भावनाएं आहत हुईं।
कांग्रेस का बचाव:
कांग्रेस ने इसे “राजनीतिक साजिश” बताया। नेता सचिन सावंत ने कहा कि भाजपा पहले टीपू की तारीफ करती थी, अब वोट बैंक के लिए विरोध कर रही है। सपकाल ने कहा कि भाजपा मुद्दों से ध्यान भटका रही है।
यह विवाद महाराष्ट्र में हिंदुत्व और इतिहास की राजनीति को फिर गरमा रहा है। टीपू सुल्तान को लेकर पहले भी कई बार विवाद हुआ है—कुछ उन्हें स्वतंत्रता सेनानी मानते हैं, जबकि कई उन्हें हिंदू विरोधी बताते हैं।
क्या आपको लगता है कि यह तुलना सही थी या राजनीतिक बयानबाजी? कमेंट में बताएं और अपनी राय दें!
