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साइबर ठगी पर करारा प्रहार: गृह मंत्री अमित शाह ने सभी बैंकों से ‘म्यूल अकाउंट हंटर’ सॉफ्टवेयर अपनाने की मांग की

साइबर ठगी पर करारा प्रहार: गृह मंत्री अमित शाह ने सभी बैंकों से ‘म्यूल अकाउंट हंटर’ सॉफ्टवेयर अपनाने की मांग की

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने साइबर फ्रॉड को राष्ट्रीय सुरक्षा की बड़ी चुनौती बताते हुए सभी सरकारी, निजी और सहकारी बैंकों से ‘म्यूल अकाउंट हंटर’ (Mule Account Hunter) सॉफ्टवेयर को तुरंत अपनाने (universal adoption) का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि जब तक सभी बैंक इस टूल से अपने सिस्टम को पूरी तरह साफ नहीं करेंगे, तब तक साइबर अपराध पर पूर्ण नियंत्रण संभव नहीं होगा।

यह सॉफ्टवेयर भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के संयुक्त प्रयास से विकसित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य म्यूल अकाउंट्स (mule accounts) का पता लगाना और उन्हें खत्म करना है, जो डिजिटल ठगी का सबसे बड़ा माध्यम बन चुके हैं।

म्यूल अकाउंट क्या होते हैं?

म्यूल अकाउंट वे बैंक खाते होते हैं जिन्हें ठगों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। अपराधी लोगों को लालच देकर या धोखे से ऐसे खाते खुलवाते हैं, उनमें ठगी का पैसा जमा करवाते हैं और फिर उसे कई स्तरों पर ट्रांसफर करके अपनी पहचान छिपा लेते हैं। ये खाते मनी लॉन्ड्रिंग और साइबर फ्रॉड में मुख्य कड़ी का काम करते हैं, जिससे पीड़ितों को पैसा वापस मिलना मुश्किल हो जाता है।

‘म्यूल अकाउंट हंटर’ कैसे काम करता है?

यह एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) आधारित उन्नत टूल है, जिसे RBI इनोवेशन हब (RBIH) ने दिसंबर 2024 में लॉन्च किया था। यह पारंपरिक नियम-आधारित सिस्टम से अलग है और रीयल-टाइम में विभिन्न बैंकों के ट्रांजेक्शन पैटर्न, अकाउंट एक्टिविटी और व्यवहार का विश्लेषण करता है। संदिग्ध अकाउंट्स को स्कोर देता है, जिससे बैंक उन्हें जल्दी पहचानकर फ्रीज या ब्लॉक कर सकें।

इससे फ्रॉड की रकम को ट्रैक करना आसान होता है।

पायलट प्रोजेक्ट में कई बड़े बैंकों ने इसे अपनाया और अब 20+ बैंक इससे जुड़ चुके हैं।

गृह मंत्री ने हाल ही में CBI की एक नेशनल कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह टूल साइबर फ्रॉड के इकोसिस्टम को तोड़ने में गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

सरकार की उपलब्धियां और आगे की योजना

अमित शाह ने बताया कि हाल के प्रयासों से ₹20,000 करोड़ के साइबर फ्रॉड में से ₹8,189 करोड़ फ्रीज कर पीड़ितों को लौटाया गया है। I4C (Indian Cyber Crime Coordination Centre) पोर्टल पर 62 बैंक जुड़ चुके हैं। अब फोकस सभी बैंकों को इस टूल से जोड़ने और डिसेंबर 2026 तक पूर्ण क्रियान्वयन पर है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सभी बैंक इसे अपनाते हैं तो डिजिटल फ्रॉड में भारी कमी आएगी और आम लोगों की सुरक्षा मजबूत होगी। साइबर ठगी अब सिर्फ आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बन चुकी है।

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