उत्तराखंड में ग्रीन सेस की नई व्यवस्था: 15 फरवरी से 15 सीमावर्ती चेकपॉइंट्स पर शुरू होगी वसूली, लक्ष्य सालाना 100 करोड़ की अतिरिक्त आय
उत्तराखंड में ग्रीन सेस की नई व्यवस्था: 15 फरवरी से 15 सीमावर्ती चेकपॉइंट्स पर शुरू होगी वसूली, लक्ष्य सालाना 100 करोड़ की अतिरिक्त आय
उत्तराखंड सरकार ने राज्य की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए ग्रीन सेस को बड़े पैमाने पर लागू करने का फैसला लिया है। लंबे समय से चल रहे होमवर्क के बाद अब इस योजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है। राज्य के 15 सीमावर्ती क्षेत्रों को ग्रीन सेस वसूलने के लिए चिन्हित किया गया है, जहां से हर साल करीब 100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय जुटाने का फ्रेमवर्क तैयार किया गया है।
परिवहन विभाग ने 15 फरवरी 2026 से इन 15 स्थानों पर ग्रीन सेस की वसूली शुरू करने का लक्ष्य रखा है। इन सभी चेकपॉइंट्स पर ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए जाएंगे, जो वाहनों की नंबर प्लेट स्कैन कर स्वचालित रूप से सेस वसूलेंगे। इससे मानवीय हस्तक्षेप कम होगा, पारदर्शिता बढ़ेगी और अनियमितता की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाएगी।
वर्तमान में नारसन बॉर्डर पर दूसरे राज्यों से आने वाले निजी वाहनों से ग्रीन सेस लिया जा रहा है, जिससे रोजाना 25-30 लाख रुपये का राजस्व मिल रहा है। अब यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में विस्तारित हो रही है, खासकर उन निजी वाहनों पर जो दूसरे राज्यों से चारधाम यात्रा, कांवड़, हेमकुंड साहिब, हरिद्वार-ऋषिकेश जैसे धार्मिक और पर्यटन स्थलों के लिए आते हैं।
सेस की दरें इस प्रकार हैं:
हल्के निजी वाहन (कार/जीप) – 80 रुपये
12 सीट से अधिक वाली बसें – 140 रुपये
7 एक्सल वाले भारी वाहन – 700 रुपये
छूट वाली श्रेणियां:
सरकारी वाहन
अग्निशमन सेवा के वाहन
एंबुलेंस
दोपहिया और तिपहिया वाहन
सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहन
परिवहन अधिकारी एसके सिंह ने बताया कि यह व्यवस्था न सिर्फ राजस्व बढ़ाएगी, बल्कि पर्यावरण पर बढ़ते दबाव को कम करने में भी मदद करेगी। उत्तराखंड एक संवेदनशील हिमालयी राज्य है, जहां वाहनों की बढ़ती संख्या से प्रदूषण और ट्रैफिक का बोझ बढ़ रहा है। ग्रीन सेस के जरिए सरकार यह संदेश दे रही है कि राज्य में प्रवेश करने वाले हर वाहन को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभानी होगी।
ANPR सिस्टम से रियल-टाइम डेटा मिलेगा, जिससे बॉर्डर पर आने-जाने वाले वाहनों की संख्या और पैटर्न का विश्लेषण आसान हो जाएगा। अगर यह प्रयोग सफल रहा तो भविष्य में अन्य क्षेत्रों में भी इसी तकनीक का विस्तार किया जा सकता है।
यह कदम उत्तराखंड के लिए दोहरे फायदे वाला साबित हो सकता है – एक तरफ आर्थिक मजबूती, दूसरी तरफ पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबल टूरिज्म को बढ़ावा। पर्यटकों और स्थानीय लोगों से अपील है कि वे पर्यावरण-अनुकूल वाहनों का इस्तेमाल करें ताकि सेस से छूट मिल सके।
