उत्तराखंड

अंकिता भंडारी हत्याकांड, देहरादून में महापंचायत, CBI जांच की फिर उठी मांग

देहरादून के परेड ग्राउंड के बाहर रविवार को अंकिता भंडारी न्याय के लिए अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच द्वारा आयोजित महापंचायत में बड़ी संख्या में लोग जुटे। महापंचायत में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत इंडिया गठबंधन के घटक दल, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, विभिन्न सामाजिक संगठन और जन सरोकारों से जुड़े लोग शामिल हुए। यह महापंचायत अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को तेज करने और सरकार पर दबाव बनाने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी।

महापंचायत को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डॉ. सत्यनारायण सचान ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “सीएम धामी पर्यावरणविद की FIR को आधार बनाकर CBI जांच करवा रहे हैं, जबकि CBI जांच अंकिता के माता-पिता की तहरीर पर होनी चाहिए।” डॉ. सचान ने मांग की कि जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए ताकि निष्पक्षता बनी रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने साक्ष्य मिटाए हैं, उन्हें भी CBI जांच की परिधि में लाया जाए।

महापंचायत में अन्य वक्ताओं ने भी सरकार पर आरोप लगाया कि अंकिता मामले में देरी और साक्ष्य छिपाने की कोशिश की जा रही है। राज्य आंदोलनकारियों ने कहा कि यह मामला सिर्फ एक लड़की की मौत नहीं, बल्कि उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था का सवाल है। इंडिया गठबंधन के नेताओं ने एकजुट होकर कहा कि वे अंकिता के परिवार के साथ हैं और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।

महापंचायत में प्रस्ताव पारित किया गया कि:

CBI जांच अंकिता के माता-पिता की शिकायत पर आधारित हो।

जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो।

साक्ष्य नष्ट करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो।

दोषियों को जल्द सजा मिले।

यह महापंचायत उत्तराखंड की राजनीति में नया मोड़ ला सकती है, जहां विपक्ष अंकिता मामले को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है। मुख्यमंत्री धामी ने पहले ही CBI जांच का ऐलान किया था, लेकिन अब विपक्ष सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग और जांच के आधार पर सवाल उठा रहा है। अंकिता के परिवार और समर्थकों ने महापंचायत का स्वागत किया है और कहा है कि वे न्याय के लिए हर स्तर पर लड़ेंगे।

सोशल मीडिया पर #JusticeForAnkita ट्रेंड कर रहा है और लोग महापंचायत की तस्वीरें शेयर कर रहे हैं। यह घटना उत्तराखंड में महिलाओं की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रही है।

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