यूजीसी कानून के विरोध में सवर्ण समाज का आक्रोश चरम पर: 8 मार्च को दिल्ली कूच, हजारों नागा साधु उतरेंगे सड़कों पर
यूजीसी कानून के विरोध में सवर्ण समाज का आक्रोश चरम पर: 8 मार्च को दिल्ली कूच, हजारों नागा साधु उतरेंगे सड़कों पर
उत्तराखंड और देशभर में यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) के प्रस्तावित कानून के खिलाफ सवर्ण समाज का विरोध तेज हो गया है। सवर्ण समाज समन्वय समिति के आह्वान पर 8 मार्च 2026 को दिल्ली में ‘यूजीसी रोल बैक महाआंदोलन’ होने जा रहा है। हरिद्वार स्थित श्री अखंड परशुराम अखाड़े और काली सेना के पदाधिकारियों ने सवर्ण समाज से बड़ी संख्या में दिल्ली कूच करने की अपील की है।
काली सेना के प्रमुख स्वामी आनंद स्वरूप ने उत्तरी हरिद्वार के शांभवी धाम आश्रम में सभा को संबोधित करते हुए यूजीसी कानून को ‘काला कानून’ करार दिया। उन्होंने कहा, “यह कानून सनातन धर्म और सवर्ण समाज के खिलाफ है। सरकार वोट बैंक की राजनीति के लिए हिंदू समाज को जातियों में बांट रही है।” स्वामी आनंद स्वरूप ने दावा किया कि 8 मार्च को हजारों नागा साधु दिल्ली की सड़कों पर उतरेंगे और रामलीला मैदान में महाआंदोलन करेंगे। उन्होंने सरकार से तुरंत कानून वापस लेने की मांग की और चेतावनी दी कि अगर मांग नहीं मानी गई तो देशभर में भाजपा के खिलाफ अभियान तेज होगा।
अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “यूजीसी जैसा काला कानून थोपकर सरकार सनातन धर्म के खिलाफ काम कर रही है। जब सनातन धर्म के लोग एकजुट हो रहे हैं, तब सरकार उन्हें बांटने का प्रयास कर रही है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी जाति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकार की विभाजनकारी नीतियों के खिलाफ है। पंडित कौशिक ने कहा कि जनता अब भाजपा की असलियत समझ चुकी है और आगामी चुनावों में सत्ता से बाहर करने के लिए काम करेंगे।
इसी बीच, उधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर में सवर्ण समाज ने एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया। समाज के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में यूजीसी कानून को ‘समानता के सिद्धांतों के विपरीत’ और ‘सवर्ण समाज तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए घातक’ बताया गया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यह कानून बिना व्यापक विमर्श के लागू करने की कोशिश की जा रही है और विशेष रूप से सवर्ण समाज को निशाना बनाता है। उन्होंने मांग की कि कानून तत्काल वापस लिया जाए, अन्यथा आंदोलन और तेज होगा।
सवर्ण समाज के नेताओं का कहना है कि प्रस्तावित यूजीसी कानून शिक्षा क्षेत्र में असमानता बढ़ाएगा और सामाजिक संतुलन बिगाड़ेगा। 8 मार्च का महाआंदोलन दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन बन सकता है, जहां साधु-संतों के साथ हजारों लोग शामिल होने वाले हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विरोध भाजपा सरकार के लिए नया चुनौती पैदा कर सकता है, खासकर उत्तराखंड जैसे राज्यों में जहां सनातन और सवर्ण मुद्दे संवेदनशील हैं।
