आज ही लॉन्च हुआ था ‘फेसबुक’… हार्वर्ड के डॉर्म रूम से निकली वो क्रांति जो पूरी दुनिया पर छा गई
आज ही लॉन्च हुआ था ‘फेसबुक’… हार्वर्ड के डॉर्म रूम से निकली वो क्रांति जो पूरी दुनिया पर छा गई
ठीक 22 साल पहले आज ही, 4 फरवरी 2004 को, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक 19 साल के छात्र मार्क जुकरबर्ग ने अपने डॉर्म रूम से एक साधारण वेबसाइट लॉन्च की थी, जिसका नाम था “TheFacebook”। शुरू में सिर्फ हार्वर्ड के छात्रों के लिए बनी ये साइट आज फेसबुक (अब Meta Platforms) के नाम से जानी जाती है और दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनी बन चुकी है, जिसके 3 अरब से ज्यादा मंथली एक्टिव यूजर्स हैं।
मार्क जुकरबर्ग ने अपने रूममेट्स एडुआर्डो सावरिन, डस्टिन मोस्कोविट्ज, क्रिस ह्यूजेस और एंड्र्यू मैककॉलम के साथ मिलकर इस प्लेटफॉर्म को बनाया। शुरुआत में ये सिर्फ हार्वर्ड स्टूडेंट्स को कनेक्ट करने का तरीका था—प्रोफाइल बनाने, फोटो अपलोड करने, क्लास शेड्यूल और क्लब्स शेयर करने का। लॉन्च के पहले 24 घंटों में ही 1,200 से ज्यादा यूजर्स जुड़ गए और महीने के अंत तक हार्वर्ड के आधे से ज्यादा छात्र इसमें शामिल हो चुके थे।
इससे पहले अक्टूबर 2003 में जुकरबर्ग ने Facemash नाम की एक साइट बनाई थी, जहां छात्रों की फोटोज पर वोटिंग होती थी “हॉट या नॉट”। ये साइट विवादों में घिर गई और यूनिवर्सिटी ने इसे बंद कर दिया, लेकिन इसने जुकरबर्ग को एक बड़े आइडिया की ओर प्रेरित किया—एक यूनिवर्सल “फेसबुक” (स्टूडेंट डायरेक्टरी) बनाने का। उन्होंने कहा था, “यूनिवर्सिटी को सालों लगेंगे, मैं इसे एक हफ्ते में बेहतर बना सकता हूं।”
लॉन्च के कुछ महीनों में ही TheFacebook अन्य आईवी लीग यूनिवर्सिटीज जैसे येल, कोलंबिया और स्टैनफोर्ड तक फैल गया। 2004 के अंत तक 1 मिलियन यूजर्स हो गए और पीटर थील ने 5 लाख डॉलर का निवेश किया। जुकरबर्ग ने हार्वर्ड छोड़कर कंपनी को कैलिफोर्निया शिफ्ट कर दिया। 2005 में नाम बदलकर सिर्फ Facebook कर दिया गया और 2006 में आम लोगों के लिए खोल दिया गया।
आज फेसबुक सिर्फ सोशल नेटवर्किंग नहीं, बल्कि दुनिया भर में कनेक्टिविटी, बिजनेस, न्यूज और एंटरटेनमेंट का केंद्र बन चुका है। हालांकि प्राइवेसी, फेक न्यूज और मेंटल हेल्थ जैसे मुद्दों पर विवाद भी रहे हैं, लेकिन इसका असर निर्विवाद है—एक छोटे से हार्वर्ड डॉर्म रूम से शुरू हुई ये यात्रा अब पूरी दुनिया को जोड़ रही है।
