ऋषिकेश में ‘बापू ग्राम बचाओ’ महारैली: हजारों लोग सड़कों पर उतरे, शहर चोक, वन भूमि प्रकरण में घर-जमीन बचाने की पुकार
ऋषिकेश में ‘बापू ग्राम बचाओ’ महारैली: हजारों लोग सड़कों पर उतरे, शहर चोक, वन भूमि प्रकरण में घर-जमीन बचाने की पुकार
ऋषिकेश: उत्तराखंड के ऋषिकेश में वन भूमि प्रकरण को लेकर आज बड़ा जनाक्रोश सामने आया। ‘बापू ग्राम बचाओ संघर्ष समिति’ के बैनर तले निकाली गई महारैली में हजारों स्थानीय निवासियों ने हिस्सा लिया। रैली आईडीपीएल खेल मैदान से शुरू होकर ऋषिकेश तहसील कार्यालय तक पहुंची, जिसके कारण पूरा शहर जाम हो गया। लोग गलियों और छोटे रास्तों से आवाजाही करने को मजबूर हुए।
रैली में शिवाजी नगर, मीरा नगर, 20 बीघा, बापू ग्राम, मनसा देवी, अमित ग्राम और आसपास के इलाकों के निवासी शामिल हुए। इन क्षेत्रों में रहने वाले हजारों लोग अपनी घर-जमीन पर वन विभाग के दावे और संभावित बेदखली के खिलाफ एकजुट होकर सड़कों पर उतरे। समिति के अनुसार, रैली में 20 हजार से ज्यादा लोगों ने भाग लिया, जिन्होंने एकता का मजबूत प्रदर्शन किया और सरकार से अपनी मांगों पर तत्काल कार्रवाई की अपील की।
प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए – “हमारा घर, हमारी जमीन, वन विभाग से नहीं छीनेंगे”, “ऋषिकेश बचाओ, बापू ग्राम बचाओ”। कई लोगों ने हाथों में प्लेकार्ड लिए हुए थे, जिन पर लिखा था – “वन भूमि पर बसे घर वैध हैं”, “बेदखली रोकें, न्याय दो”। रैली के दौरान यातायात पूरी तरह ठप हो गया, जिससे आम नागरिकों को परेशानी हुई। पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे और रैली शांतिपूर्ण तरीके से तहसील पहुंची।
बापू ग्राम बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक ने बताया कि ऋषिकेश के कई इलाकों में लोग दशकों से रह रहे हैं, लेकिन वन विभाग ने इन्हें वन भूमि घोषित कर बेदखली की कार्रवाई शुरू कर दी है। समिति का कहना है कि ये भूमि पहले से बसे हुए गांव और कॉलोनियां हैं, जहां लोग वैध दस्तावेजों के साथ रह रहे हैं। विभाग की कार्रवाई से हजारों परिवार बेघर होने की कगार पर हैं।
प्रदर्शनकारियों ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा, जिसमें मांग की गई कि वन भूमि प्रकरण में स्थानीय निवासियों के दस्तावेजों की जांच कर वैध बस्तियों को मान्यता दी जाए और बेदखली की कार्रवाई रोकी जाए। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज होगा।
यह महारैली उत्तराखंड में वन भूमि विवादों के बढ़ते संकट को उजागर करती है, जहां विकास और संरक्षण के बीच टकराव आम हो गया है। स्थानीय लोग अब राज्य सरकार और वन विभाग से त्वरित समाधान की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि उनके घर-परिवार सुरक्षित रह सकें। शहर में आज का दिन ‘ऋषिकेश बचाओ’ की आवाज से गूंजता रहा।
