भारत-EU ट्रेड डील से अमेरिका क्यों बेचैन? ट्रंप की टैरिफ नीति के बीच ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ ने क्यों बढ़ाई चिंता
भारत-EU ट्रेड डील से अमेरिका क्यों बेचैन? ट्रंप की टैरिफ नीति के बीच ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ ने क्यों बढ़ाई चिंता
भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने 27 जनवरी 2026 को लगभग 20 साल पुरानी नेगोशिएशंस के बाद एक ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर सहमति जता दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा, क्योंकि यह दुनिया के 25% GDP और 1.9 अरब से ज्यादा लोगों के बाजार को जोड़ेगा। EU कमिशन प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे “दो अरब लोगों का फ्री ट्रेड जोन” बताया।
यह डील ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति (जैसे EU और भारत पर उच्च टैरिफ) से वैश्विक व्यापार अस्थिर हो गया है। भारत-EU FTA से अमेरिका की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि यह अमेरिका की “अमेरिका फर्स्ट” पॉलिसी को चुनौती दे रही है।
डील के मुख्य पॉइंट्स क्या हैं?
टैरिफ कट: EU से भारत में आने वाले 97% सामान पर टैरिफ खत्म या काफी कम होंगे। भारत से EU में 97% टैरिफ लाइंस पर प्रेफरेंशियल एक्सेस (99.5% ट्रेड वैल्यू कवर)।
बेनिफिट्स: EU के एक्सपोर्ट्स भारत में 2032 तक दोगुने होने की उम्मीद। भारत के टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, लेदर, फार्मा, मशीनरी आदि सेक्टर को बड़ा फायदा। EU को ऑटोमोबाइल, वाइन, ऑलिव ऑयल, चॉकलेट आदि पर कम टैरिफ मिलेगा।
अन्य: सेवाओं में लिबरलाइजेशन, SME चैप्टर, सस्टेनेबल ट्रेड, क्लाइमेट कोऑपरेशन। संवेदनशील सेक्टर जैसे डेयरी, चावल, चीनी, बीफ, पोल्ट्री को प्रोटेक्ट किया गया।
अमल: अभी नेगोशिएशंस खत्म हुई हैं—लीगल वेटिंग, ट्रांसलेशन और रैटिफिकेशन के बाद 2026-27 में लागू हो सकती है।
अमेरिका क्यों बेचैन और क्या नुकसान?
अमेरिका की चिंता मुख्य रूप से ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी से जुड़ी है, जो EU और भारत दोनों को प्रभावित कर रही है। प्रमुख कारण:
ट्रेड डाइवर्सिफिकेशन और US से दूरी
भारत और EU अब अमेरिका पर कम निर्भर होंगे। ट्रंप की उच्च टैरिफ (EU पर 15%+, भारत पर 50% तक) से दोनों देश एक-दूसरे की ओर मुड़ रहे हैं। इससे US एक्सपोर्ट्स प्रभावित हो सकते हैं—EU और भारत का कॉम्बाइंड मार्केट US से बड़ा हो जाएगा।
US मार्केट का नुकसान
एक्सपर्ट्स (जैसे ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव) कहते हैं कि US मार्केट का नुकसान EU FTA से पूरा नहीं होगा, लेकिन भारत के लिए EU बड़ा अल्टरनेटिव बन रहा है। अमेरिका को भारत-EU डील “अमेरिका फर्स्ट” पॉलिसी का बैकलैश लग रहा है।
रूस-यूक्रेन और ऑयल ट्रेड पर आरोप
US ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने डील के ठीक पहले आरोप लगाया कि भारत रूस से सस्ता ऑयल खरीदकर रिफाइन करके EU को बेच रहा है, जो यूक्रेन युद्ध को फाइनेंस कर रहा है। इससे US की चिंता बढ़ी कि EU अब भारत के साथ मजबूत होकर रूस पर निर्भरता कम करेगा, लेकिन US की स्ट्रैटेजी प्रभावित होगी।
ग्लोबल ट्रेड में US की पोजिशन कमजोर
ट्रंप की टैरिफ से दुनिया में प्रोटेक्शनिज्म बढ़ा है। भारत-EU डील ओपन ट्रेड का मैसेज दे रही है। इससे US-इंडिया ट्रेड डील पर भी असर—अमेरिका अब भारत से जल्द डील चाहता है, वरना भारत-EU से ज्यादा फायदा उठाएगा। US ट्रेड रिप जेमिसन ग्रीर ने कहा कि भारत इस डील से “टॉप पर” आ रहा है।
सप्लाई चेन और जियोपॉलिटिकल
EU और भारत चीन पर निर्भरता कम करना चाहते हैं। US भी चीन से डीकपलिंग चाहता है, लेकिन ट्रंप की पॉलिसी से EU-इंडिया करीब आ गए। इससे US की ग्लोबल इकोनॉमिक लीवरेज कम हो सकती है।
भारत-EU डील का असर
भारत: एक्सपोर्ट्स बढ़ेंगे, जॉब्स (टेक्सटाइल में 6-7 मिलियन), इन्वेस्टर कॉन्फिडेंस।
EU: भारत जैसे फास्ट-ग्रोइंग मार्केट में एंट्री, जॉब्स और ग्रोथ।
अमेरिका: शॉर्ट टर्म में ट्रेड बैलेंस पर असर, लॉन्ग टर्म में US-इंडिया डील पर प्रेशर।
यह डील वैश्विक ट्रेड में नया दौर शुरू कर रही है, जहां अमेरिका की आक्रामक नीति से देश अल्टरनेटिव पार्टनर तलाश रहे हैं। अपडेट्स के लिए फॉलो करें—डील की रैटिफिकेशन 2026-27 में हो सकती है!
