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कहानी में अब नया ट्विस्ट: GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह ने 2022 में बीजेपी से मऊ से विधानसभा टिकट की दावेदारी की थी, बनना चाहते थे विधायक

कहानी में अब नया ट्विस्ट: GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह ने 2022 में बीजेपी से मऊ से विधानसभा टिकट की दावेदारी की थी, बनना चाहते थे विधायक

उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य विवाद और UGC नियमों के खिलाफ इस्तीफों की बाढ़ आई है, लेकिन अयोध्या के GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह की कहानी में अब नया ट्विस्ट आ गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में इस्तीफा दिया था, लेकिन अब सामने आया है कि 2022 में ही उन्होंने बीजेपी से मऊ जिले से विधानसभा टिकट की दावेदारी की थी और विधायक बनने की इच्छा रखते थे।

सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रशांत कुमार सिंह उस समय GST विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर थे। उन्होंने मऊ विधानसभा सीट से बीजेपी टिकट मांगा था, लेकिन टिकट नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया और नौकरी जारी रखी। बाद में प्रमोशन मिला और वे डिप्टी कमिश्नर बनकर अयोध्या में पोस्टेड हुए।

प्रशांत सिंह का जन्म 28 अक्टूबर 1978 को मऊ जिले के सरवां गांव में हुआ। वे मूल रूप से राजनीतिक पृष्ठभूमि से हैं और PCS बनने से पहले भी राजनीति में सक्रिय थे। 2013 में PCS में चयनित होने के बाद उनकी पहली पोस्टिंग सहारनपुर में हुई थी। 2023 में अयोध्या में तैनाती हुई।

इस्तीफे के बाद अब उनके खिलाफ गंभीर आरोप लगे हैं। उनके सगे बड़े भाई डॉ. विश्वजीत सिंह ने आरोप लगाया है कि प्रशांत ने फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र (डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट) लगाकर नौकरी हासिल की। भाई ने CMO को पत्र लिखकर प्रमाण पत्र की दोबारा जांच की मांग की थी। जांच अंतिम चरण में है और शिकायत के बाद उन्हें मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने को कहा गया था, लेकिन वे पेश नहीं हुए।

प्रशांत सिंह ने 27 जनवरी को भावुक होकर इस्तीफा दिया। उन्होंने पत्नी को फोन पर रोते हुए कहा कि “शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और CM योगी के खिलाफ बयानों को बर्दाश्त नहीं कर सका।” इस्तीफा राज्यपाल को भेजा गया, जिसमें उन्होंने सरकार, संविधान और योगी के प्रति वफादारी जताई।

यह घटना उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण-राजनीतिक तनाव के बीच आई है। एक तरफ बरेली की सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने UGC नियमों और शंकराचार्य के कथित अपमान पर इस्तीफा दिया (जिसके बाद सस्पेंड), वहीं प्रशांत सिंह का इस्तीफा योगी समर्थन में था। अब टिकट दावेदारी और फर्जी सर्टिफिकेट के आरोपों से उनकी छवि पर सवाल उठ रहे हैं।

विपक्ष इसे राजनीतिक नाटक बता रहा है, जबकि BJP समर्थक इसे “वफादारी” का उदाहरण मान रहे हैं। जांच आगे बढ़ रही है और 2027 विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा गरमा सकता है।

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