राजनीति

यूजीसी इक्विटी रेगुलेशंस 2026 विवाद: राजनीतिक पार्टियों और नेताओं के बयान – क्या कहा किसने?

यूजीसी इक्विटी रेगुलेशंस 2026 विवाद: राजनीतिक पार्टियों और नेताओं के बयान – क्या कहा किसने?

यूजीसी (प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस) रेगुलेशंस 2026 को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन, इस्तीफे और सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल होने के बीच राजनीतिक दलों और नेताओं की प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। नियमों में SC/ST/OBC के खिलाफ जातिगत भेदभाव रोकने के लिए इक्विटी कमेटी, हेल्पलाइन और सजा के प्रावधान हैं, लेकिन विरोध करने वाले इसे “जनरल कैटेगरी के खिलाफ भेदभावपूर्ण” और “काला कानून” बता रहे हैं।

BJP और सरकार की तरफ से

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान: “कोई भेदभाव नहीं होगा, नियमों का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में बने हैं। कोई भी गलत इस्तेमाल नहीं कर सकता।” उन्होंने स्पष्ट किया कि नियम समानता के लिए हैं, न कि किसी वर्ग के खिलाफ।

BJP नेता और पूर्व सांसद निशिकांत दुबे: सोशल मीडिया पर कहा कि “सभी भ्रम दूर होंगे, PM मोदी की सरकार जनरल कैटेगरी छात्रों के हितों की रक्षा करेगी।”

BJP युवा मोर्चा और किसान मोर्चा के नेता: कई ने इस्तीफा दिया – जैसे नोएडा BJP युवा मोर्चा उपाध्यक्ष राजू पंडित, रायबरेली किसान मोर्चा उपाध्यक्ष श्याम सुंदर त्रिपाठी। उन्होंने नियमों को “विभाजनकारी” और “एंटी-जनरल” बताया।

कुमार विश्वास (पूर्व BJP नेता): “मैं आभागा सवर्ण हूं, रोंया-रोंया उखाड़ लो।” उन्होंने नियमों की आलोचना की।

BJP के कुछ नेता: चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन UP में इस्तीफों से पार्टी के अंदर असहजता दिख रही है।

विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया

कांग्रेस: पार्टी ने खुले तौर पर विरोध नहीं किया, लेकिन राज्या सभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने X पर कहा – “नियमों को वापस लें या जरूरी संशोधन करें।” कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि “खुले विरोध से BJP हमें एंटी-दलित/ओबीसी बताएगी, इसलिए सतर्क हैं।”

RJD (राष्ट्रीय जनता दल): प्रवक्ता शक्ति यादव ने समर्थन किया – “यह आरक्षित वर्ग को कवच देने वाला कानून है। केंद्र चुप है, जबकि कुछ वर्ग हाय-तौबा मचा रहे हैं।”

समाजवादी पार्टी (SP): अभी तक कोई बड़ा बयान नहीं, लेकिन पार्टी के कुछ नेता छात्रों के विरोध में शामिल दिखे हैं।

अन्य विपक्षी: आम तौर पर चुप्पी, क्योंकि विरोध करने से “एंटी-ओबीसी/दलित” का ठप्पा लग सकता है।

अन्य प्रमुख बयान

कर्णी सेना और सवर्ण संगठन: “एंटी-ब्राह्मण कैंपेन” बता रहे हैं, दिल्ली UGC हेडक्वार्टर पर घेराव किया।

सुप्रीम कोर्ट में PIL: कई याचिकाएं दाखिल – नियमों की परिभाषा को “संकीर्ण” बताते हुए संशोधन की मांग।

शिक्षाविद और छात्र नेता: कुछ नियमों को “जरूरी” बता रहे हैं (रोहित वेमुला, पायल तड़वी जैसे मामलों के बाद), जबकि विरोधी “फर्जी शिकायतों” का डर जता रहे हैं।

विवाद अब UP, दिल्ली, बिहार तक फैल चुका है। सरकार “मिसइनफॉर्मेशन” पर फैक्ट्स पेश करने की तैयारी में है। क्या नियम संशोधित होंगे या विरोध और बढ़ेगा – यह आने वाले दिनों में साफ होगा।

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