राजनीति

नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने छोड़ी कांग्रेस: मायावती के पुराने करीबी अब किस राह पर? चंद्रशेखर से हाथ मिलाने की अटकलें!

नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने छोड़ी कांग्रेस: मायावती के पुराने करीबी अब किस राह पर? चंद्रशेखर से हाथ मिलाने की अटकलें!

उत्तर प्रदेश की सियासत में बड़ा उलटफेर! पूर्व बसपा मंत्री और मायावती के एक समय बहुत करीबी रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने आज (24 जनवरी 2026) कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भेजा है। यह यूपी में कांग्रेस को बड़ा झटका माना जा रहा है, खासकर आगामी पंचायत चुनावों और विधानसभा चुनावों से पहले।

इस्तीफे का कारण क्या बताया?

नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने इस्तीफे में “अपरिहार्य कारण” बताए हैं।

कई रिपोर्ट्स में उन्होंने पार्टी में वैचारिक घुटन, जनता की लड़ाई न लड़ पाने और संगठन में असंतोष की बात कही है।

वे 2018 में बसपा से निकाले जाने के बाद कांग्रेस में शामिल हुए थे, जहां उन्हें पश्चिमी यूपी में महत्वपूर्ण भूमिका मिली थी (पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष भी रहे)।

इस्तीफे के साथ उन्होंने अपने कई करीबी साथियों को भी साथ लिया है, जिससे प्रभाव और बढ़ गया है।

राजनीतिक सफर का बैकग्राउंड

मायावती के करीबी: नसीमुद्दीन सिद्दीकी बसपा में लंबे समय तक रहे – मंत्री बने, पार्टी के खजाने के संरक्षक भी। 2017 में बसपा से निष्कासित होने के बाद उन्होंने अपना अलग संगठन बनाया था, फिर 2018 में कांग्रेस जॉइन की।

अब कांग्रेस छोड़ने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि वे कहां जाएंगे? क्या बसपा में वापसी? या कोई नया रास्ता?

चंद्रशेखर आजाद से हाथ मिलाने की अटकलें क्यों?

सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) में शामिल हो सकते हैं।

कारण: दोनों दल बहुजन और दलित-मुस्लिम वोट बैंक पर फोकस करते हैं। चंद्रशेखर हाल ही में मुस्लिम समुदाय में सक्रिय हुए हैं (मेरठ में 2000+ मुसलमानों को जॉइन कराने का दावा)।

नसीमुद्दीन का मुस्लिम चेहरा और अनुभव चंद्रशेखर के लिए फायदेमंद हो सकता है, खासकर पश्चिमी यूपी में।

हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। न तो नसीमुद्दीन ने और न ही चंद्रशेखर ने इस पर कोई बयान दिया है। यह सिर्फ अटकलें हैं, जो यूपी की सियासत में आम हैं।

कांग्रेस पर असर?

कांग्रेस पहले से ही यूपी में कमजोर है। नसीमुद्दीन जैसे वरिष्ठ नेता का जाना और संगठन को नुकसान पहुंचाएगा।

पार्टी अब उन्हें मनाने की कोशिश कर सकती है – कुछ रिपोर्ट्स में अजय राय जैसे नेताओं के मनाने जाने की बात है।

कुल मिलाकर, यूपी की राजनीति में एक और बड़ा ट्विस्ट! क्या नसीमुद्दीन चंद्रशेखर के साथ नई ताकत बनेंगे या कोई और सरप्राइज? सियासी गलियारों में चर्चा तेज है। क्या लगता है आपको?

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