उत्तराखंड

शांतिपुरी में ‘जन जन की सरकार, जन जन के द्वार’ शिविर में हंगामा: आवारा सांड ने मचाई अफरा-तफरी, फिर भी 2038 लोगों को मिला लाभ

शांतिपुरी में ‘जन जन की सरकार, जन जन के द्वार’ शिविर में हंगामा: आवारा सांड ने मचाई अफरा-तफरी, फिर भी 2038 लोगों को मिला लाभ

उधम सिंह नगर जिले के किच्छा तहसील क्षेत्र के शांतिपुरी में आयोजित ‘जन जन की सरकार, जन जन के द्वार’ कार्यक्रम में गुरुवार को काफी हंगामा देखने को मिला। स्थानीय लोगों द्वारा आवारा पशुओं की समस्या को लेकर की गई मांग पर विवाद बढ़ गया और हंगामा चल ही रहा था कि तभी एक आवारा सांड शिविर में घुस आया। इससे पंडाल में अफरा-तफरी मच गई और लोग इधर-उधर भागने लगे। किसी तरह सांड को बाहर निकालकर शिविर को फिर से सुचारू रूप से चलाया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत होते ही स्थानीय निवासियों ने आवारा पशुओं से निजात दिलाने की मांग प्रशासन से की। इस दौरान किच्छा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने एक स्थानीय व्यक्ति से माइक छीन लिया, जिसके बाद शिविर में हंगामा शुरू हो गया। हंगामे के बीच ही एक गौवंशीय पशु (सांड) पंडाल में दाखिल हो गया और काफी देर तक दौड़ता रहा। लोगों ने बताया कि क्षेत्र में आवारा पशु फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं और सड़कों पर अकाल मौत का खतरा बढ़ा हुआ है।

हंगामा शांत होने के बाद शिविर में विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को लाभ वितरण जारी रहा। शिविर में कुल 2038 लोगों की समस्याओं का समाधान किया गया और उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिया गया।

शिविर में क्या-क्या हुआ?

महालक्ष्मी किट, टूल किट, प्रमाण पत्र और चेक वितरित किए गए।

रीप योजना के तहत 4 महिलाओं को ई-रिक्शा वाहन दिए गए और हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।

24 विभागों ने स्टॉल लगाकर योजनाओं की जानकारी दी।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा निःशुल्क जांच और दवा वितरण किया गया।

मौके पर आवेदन प्राप्त कर पंजीकरण और तत्काल लाभान्वयन भी हुआ।

अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय ने कहा, “शिविर में आई सभी समस्याओं का त्वरित निस्तारण करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं। जनपद की हर तहसील में निराश्रित गौवंश के आश्रय के लिए गौशालाओं का निर्माण किया जा रहा है। शीघ्र ही आवारा पशुओं की समस्या का समाधान कर लिया जाएगा।”

यह कार्यक्रम राज्य सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास है, लेकिन आवारा पशुओं की समस्या ने एक बार फिर इस मुद्दे को उजागर कर दिया। स्थानीय लोग उम्मीद जता रहे हैं कि गौशालाओं के निर्माण से उनकी समस्या जल्द खत्म होगी।

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