राष्ट्रीय

शंकराचार्य की जंग में उतरे देशभर के साधु-संत: प्रदर्शन तेज, कुछ जगह सुलह की अपील… प्रयागराज विवाद अब राजनीतिक रंग ले रहा

शंकराचार्य की जंग में उतरे देशभर के साधु-संत: प्रदर्शन तेज, कुछ जगह सुलह की अपील… प्रयागराज विवाद अब राजनीतिक रंग ले रहा

प्रयागराज के माघ मेले में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्रशासन के बीच हुए टकराव का मामला अब पूरे देश में फैल गया है। मौनी अमावस्या पर संगम स्नान के दौरान पुलिस द्वारा रथ/पालकी रोकने और शिष्यों के साथ कथित मारपीट-बाल खींचने के आरोप के बाद शंकराचार्य ने धरना शुरू किया, जो अब पांचवें दिन में प्रवेश कर चुका है। इस विवाद में अब देशभर के साधु-संत कूद पड़े हैं – एक तरफ प्रदर्शन और विरोध तेज हो रहा है, तो दूसरी तरफ कुछ संत सुलह और संवाद की अपील कर रहे हैं।

साधु-संतों का समर्थन और प्रदर्शन

हरिद्वार के हर की पैड़ी पर अखाड़ा परिषद और अन्य साधु-संतों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया। उन्होंने यूपी सरकार से माफी की मांग की और चेतावनी दी कि अगर माफी नहीं मांगी गई तो विरोध और तेज होगा। कुछ संतों ने राष्ट्रपति को ‘खून से पत्र’ लिखने की धमकी भी दी।

देवकीनंदन ठाकुर, अनिरुद्धाचार्य जैसे प्रमुख संतों ने शंकराचार्य के समर्थन में बयान दिए। बाबा रामदेव ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई।

प्रयागराज में ही कंप्यूटर बाबा सहित अन्य संत धरने में शामिल हो गए। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के कुछ पदाधिकारियों ने पुलिस कार्रवाई की निंदा की और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।

सोशल मीडिया और यूट्यूब पर वीडियो वायरल हो रहे हैं, जहां संत समाज बीजेपी सरकार पर ‘संतों का अपमान’ का आरोप लगा रहा है।

सुलह की अपील भी जारी

हरिद्वार में प्रदर्शन के दौरान ही कुछ संतों ने कहा कि संत समाज संवाद में विश्वास रखता है और समय रहते बातचीत से समाधान निकाला जा सकता है।

अखाड़ा परिषद के प्रमुख रविंद्र पुरी ने योगी सरकार का समर्थन करते हुए कहा कि विवाद बढ़ाने की बजाय शंकराचार्य को भी मामले को न बढ़ाना चाहिए। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए लेकिन सुलह का रास्ता सुझाया।

कुछ रिपोर्ट्स में दावा है कि संत समाज के बीच मतभेद हैं – कुछ शंकराचार्य का पूरा समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ आलोचना भी।

विवाद की जड़ माघ मेले में मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य को शाही स्नान के लिए रथ पर जाने से रोका गया, जिसके बाद झड़प हुई। प्रशासन ने ‘शंकराचार्य’ टाइटल के इस्तेमाल पर नोटिस जारी किया (सुप्रीम कोर्ट में केस चल रहा है), जबकि शंकराचार्य ने योगी सरकार पर साधु-संतों का तिरस्कार करने का आरोप लगाया। वे अनशन/धरने पर बैठे हैं और माफी की मांग कर रहे हैं।

विपक्ष (कांग्रेस, सपा) ने इसे ‘असहिष्णुता’ का मामला बताते हुए केंद्र-राज्य सरकार पर हमला बोला है। बीजेपी का कहना है कि यह प्रशासनिक व्यवस्था का मामला है, न कि धार्मिक अपमान।

यह विवाद अब धार्मिक से ज्यादा राजनीतिक रंग ले चुका है, खासकर बसंत पंचमी और गणतंत्र दिवस के आसपास। संत समाज की एकता और सरकार की छवि पर असर पड़ सकता है। आगे की जांच और संवाद से स्थिति साफ होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *