उत्तराखंड

गदरपुर में सियासी तनाव चरम पर: विधायक अरविंद पांडेय पर आरोप-नोटिस के बाद हजारों कार्यकर्ता जुटे, वरिष्ठ नेताओं का दौरा रद्द—विधायक बोले, ‘मैंने खुद रोका’

गदरपुर में सियासी तनाव चरम पर: विधायक अरविंद पांडेय पर आरोप-नोटिस के बाद हजारों कार्यकर्ता जुटे, वरिष्ठ नेताओं का दौरा रद्द—विधायक बोले, ‘मैंने खुद रोका’

उत्तराखंड के गदरपुर विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी विधायक अरविंद पांडेय पर लगातार लग रहे आरोपों और प्रशासन द्वारा जारी अतिक्रमण नोटिस के बाद राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। आज पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, सांसद अनिल बलूनी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के गदरपुर दौरे की सूचना मिलते ही विधायक आवास पर हजारों बीजेपी कार्यकर्ता जुट गए। सुबह से शाम तक इंतजार करने के बाद कार्यक्रम अचानक रद्द कर दिया गया। विधायक अरविंद पांडेय ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने खुद वरिष्ठ नेताओं से आग्रह किया था कि इस समय गदरपुर न आएं।

क्या हुआ आज?

सुबह से विधायक आवास पर भारी भीड़ जमा रही। कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए वरिष्ठ नेताओं के आने का इंतजार करते रहे।

दोपहर बाद सूचना मिली कि त्रिवेंद्र रावत, अनिल बलूनी और मदन कौशिक का दौरा रद्द हो गया है।

विधायक ने मंच से कहा, “मैंने खुद वरिष्ठ नेताओं और करीब 30 विधायकों से अनुरोध किया कि फिलहाल न आएं। राजनीति में हर घटना के अलग-अलग मायने निकाले जाते हैं। उनके आने से अनावश्यक राजनीतिक संदेश जा सकता था।”

उन्होंने बताया कि प्रदेश स्तर के कई नेता उनसे मुलाकात करना चाहते हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने सभी को रोका है।

बाजपुर मुकदमे पर विधायक का बयान

विधायक ने बाजपुर थाने में उनके परिवार के खिलाफ दर्ज मुकदमे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,

“जांच करना पुलिस का काम है। अगर मेरे परिवार के किसी सदस्य ने गलत किया है, तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन अगर मामला झूठा निकला, तो वादी के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”

वरिष्ठ नेता सुरेश परिहार का बयान

वन विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व राज्य मंत्री सुरेश परिहार भी विधायक आवास पहुंचे। उन्होंने पूरे मामले को पार्टी का आंतरिक विषय बताते हुए कहा,

“बीजेपी एक परिवार है। परिवार में ऐसी बातें होती रहती हैं। हम चाहते हैं कि मुख्यमंत्री, वरिष्ठ नेताओं और विधायकों के स्तर पर इस मुद्दे का जल्द समाधान हो। ऐसी घटनाओं से पार्टी और विकास कार्य दोनों प्रभावित होते हैं। जल्द ही सब सामान्य हो जाएगा।”

पृष्ठभूमि में क्या चल रहा है?

अरविंद पांडेय पर पिछले कुछ महीनों में अतिक्रमण, अवैध निर्माण और अन्य आरोप लगे हैं।

प्रशासन ने उनके आवास और संपत्तियों पर अतिक्रमण नोटिस जारी किए हैं।

कुछ दिन पहले बीजेपी विधायक बिशन सिंह चुफाल भी गदरपुर पहुंचकर उनसे मिल चुके हैं।

बीजेपी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि पार्टी हाईकमान इस मामले को संभालने की कोशिश में है, ताकि लोकसभा चुनाव के बाद विधानसभा चुनाव (2027) से पहले कोई बड़ा विवाद न उभरे।

गदरपुर विधानसभा अब बीजेपी के लिए सिरदर्द बन चुकी है। कार्यकर्ताओं का जमावड़ा और नेताओं का दौरा रद्द होना दोनों ही बातें साफ संकेत दे रही हैं कि पार्टी इस मुद्दे को शांत करने की कोशिश में जुटी है। क्या अरविंद पांडेय का यह ‘सेल्फ-कंट्रोल’ वाला स्टैंड पार्टी में उन्हें मजबूत बनाएगा, या विवाद और गहराएगा? उत्तराखंड की सियासत में अगले कुछ दिन अहम रहेंगे।

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